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विश्वास विराटता का प्रतीक : आचार्य विशुद्ध सागर
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फोटो संख्या 3
बड़ौत। आचार्य विशुद्धसागर महराज ने कहा कि जिसका जन्म होता है, उसका मरण भी निश्चित है। जो मरण के पूर्व परिणामों को संभाल लेता है, भावों को सुधार लेता है, अच्छे कार्यों में समय व्यतीत करता है, जीवो पर दया करना करता है, प्रभु का स्मरण करता है, साधुओं की सेवा करता है, सदाचार पूर्वक जीवन जीता है, उसका भविष्य निर्मल हो जाता है।
आचार्य विशुद्धसागर महराज शनिवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे बीज बोओगे वैसे फल लगेंगे। करनी का फल स्वयं को ही भोगना पड़ता है, सज्जन मनुष्य किसी के साथ विश्वास घात नहीं करते हैं। ज्येष्ठ पुरुष जिस पर विश्वास करते हैं, उसे महत्वपूर्ण कार्य सौंपते हैं। विश्वास करो, पर सोचो, समझो, संभलो। चिंतन बहुत जरूरी है। विशालता को प्राप्त करना है तो विश्वास के पात्र बनो। सफलता को प्राप्त करना है तो आस्था विश्वास के साथ वास करो। विश्वासघाती का कभी भला नहीं होता है। नाम काम में नहीं आता है। काम ही पूजा है, पूजा दिलाता है। राम में भी र है और रावण में भी र है। राम विश्व में पूजे जाते हैं और रावण का पुतला जलाया जाता है। बुराइयों को छोड़ो, अच्छाइयों को ग्रहण करो। कलुषित भाव का दहन करो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि आज प्रवचन के बाद 8 दीक्षार्थी भाइयों की गोद भराई हुई। जैन श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गए। बताया कि 14 से 16 अगस्त तक आचार्य के मंगल प्रवचन अजितनाथ सभागार मंडी में होंगे। सभा में प्रवीण जैन, सुनील जैन, संदीप जैन, अतुल जैन, विनोद जैन, वरदान जैन उपस्थित रहे।
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बड़ौत। आचार्य विशुद्धसागर महराज ने कहा कि जिसका जन्म होता है, उसका मरण भी निश्चित है। जो मरण के पूर्व परिणामों को संभाल लेता है, भावों को सुधार लेता है, अच्छे कार्यों में समय व्यतीत करता है, जीवो पर दया करना करता है, प्रभु का स्मरण करता है, साधुओं की सेवा करता है, सदाचार पूर्वक जीवन जीता है, उसका भविष्य निर्मल हो जाता है।
आचार्य विशुद्धसागर महराज शनिवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे बीज बोओगे वैसे फल लगेंगे। करनी का फल स्वयं को ही भोगना पड़ता है, सज्जन मनुष्य किसी के साथ विश्वास घात नहीं करते हैं। ज्येष्ठ पुरुष जिस पर विश्वास करते हैं, उसे महत्वपूर्ण कार्य सौंपते हैं। विश्वास करो, पर सोचो, समझो, संभलो। चिंतन बहुत जरूरी है। विशालता को प्राप्त करना है तो विश्वास के पात्र बनो। सफलता को प्राप्त करना है तो आस्था विश्वास के साथ वास करो। विश्वासघाती का कभी भला नहीं होता है। नाम काम में नहीं आता है। काम ही पूजा है, पूजा दिलाता है। राम में भी र है और रावण में भी र है। राम विश्व में पूजे जाते हैं और रावण का पुतला जलाया जाता है। बुराइयों को छोड़ो, अच्छाइयों को ग्रहण करो। कलुषित भाव का दहन करो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि आज प्रवचन के बाद 8 दीक्षार्थी भाइयों की गोद भराई हुई। जैन श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गए। बताया कि 14 से 16 अगस्त तक आचार्य के मंगल प्रवचन अजितनाथ सभागार मंडी में होंगे। सभा में प्रवीण जैन, सुनील जैन, संदीप जैन, अतुल जैन, विनोद जैन, वरदान जैन उपस्थित रहे।
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