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मोक्ष पाने के लिए श्रद्धा जरूरी: सुभद्र सागर महाराज
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मोक्ष पाने के लिए श्रद्धा जरूरी: सुभद्र सागर महाराज
खेकड़ा (बागपत)। जैन मुनि सुभद्र सागर जी महाराज ने कहा कि मोक्ष का मार्ग पाने के लिए श्रद्धा का होना जरूरी है। मोह माया के बंधन से निकल कर ही धर्म को समझा जा सकता है। धर्म के मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। वे मंगलवार को पाठशाला मार्ग स्थित वीवटैक्स पावरलूम फैक्ट्री में आयोजित धर्म सभा में श्रद्वालुओं को प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे नींव के बिना भवन एवं जड़ के बिना पेड़ स्थिर नहीं रह सकता, उसी तरह आस्था के बिना मोक्ष मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता है। आज मनुष्य धर्म मार्ग को छोड़कर अधर्म के मार्ग पर दौड़ रहा है। यही उसके पतन का कारण है। मुनिश्री ने कहा कि मटके के ऊपर प्लेट सदैव खाली रहती है। लेकिन जो नीचे झुककर आता है, वह पात्र भर जाता है। मुनीश्री न कहा कि दुनिया की दृष्टि की बजाय कर्म की दृष्टि से अच्छा बनो। कहा कि मनुष्य को साधु संतों की संगति में रहकर भगवान की भक्ति करनी चाहिए। धर्म सभा में उद्यमी योगेंद्र जैन, नरेश जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन, अजेश जैन, प्रमोद जैन, निहाल जैन, गौरव जैन, सुधीर जैन, सौरभ जैन, राहुल जैन समेत अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
शशी धामा
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खेकड़ा (बागपत)। जैन मुनि सुभद्र सागर जी महाराज ने कहा कि मोक्ष का मार्ग पाने के लिए श्रद्धा का होना जरूरी है। मोह माया के बंधन से निकल कर ही धर्म को समझा जा सकता है। धर्म के मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। वे मंगलवार को पाठशाला मार्ग स्थित वीवटैक्स पावरलूम फैक्ट्री में आयोजित धर्म सभा में श्रद्वालुओं को प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे नींव के बिना भवन एवं जड़ के बिना पेड़ स्थिर नहीं रह सकता, उसी तरह आस्था के बिना मोक्ष मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता है। आज मनुष्य धर्म मार्ग को छोड़कर अधर्म के मार्ग पर दौड़ रहा है। यही उसके पतन का कारण है। मुनिश्री ने कहा कि मटके के ऊपर प्लेट सदैव खाली रहती है। लेकिन जो नीचे झुककर आता है, वह पात्र भर जाता है। मुनीश्री न कहा कि दुनिया की दृष्टि की बजाय कर्म की दृष्टि से अच्छा बनो। कहा कि मनुष्य को साधु संतों की संगति में रहकर भगवान की भक्ति करनी चाहिए। धर्म सभा में उद्यमी योगेंद्र जैन, नरेश जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन, अजेश जैन, प्रमोद जैन, निहाल जैन, गौरव जैन, सुधीर जैन, सौरभ जैन, राहुल जैन समेत अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
शशी धामा