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शबे कद्र की रात लिखे जाते है इंसानों के नसीब, अधिक मिलता है सबाब
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संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। हाफिज कासिम अहमद ने कहा कि रमजान का मुबारक महीना चल रहा है। इसमें इंसानों को बहुत से तोहफे दिए गए जैसे कुरान इसी महीने में नाजिल हुआ (उतरा) है। इस महीने में तरावीह का एहतमाम भी किया जाता है। रमजान का सबसे बड़ा तोहफा इस महीने में शबे कद्र का दिया गया। शबे कद्र की रात में नसीब लिखे जाते हैं।
नबी मोहम्मद साहब से उनके साथियों ने कहा कि पहले लोगों की उम्र तो बहुत ज्यादा होती थी। इस हिसाब से उनके पुण्य भी ज्य़ादा होंगे। कयामत के दिन उनका दर्जा हम से बढ़ा हुआ होगा। इसके जवाब में अल्लाह ताला ने शबे कद्र इनायत फरमाई। शबे कद्र यानि रमजान महीने में एक रात ऐसी भी आती है, जो हजार महीने की रात से बेहतर होती है। शबे कद्र की रात लोगों के नसीब लिखी जानी वाली रात होती है। शबे कद्र की रात की इबादत हजार महीनों (83 वर्ष 4 महीने) की इबादतों से बेहतर और अच्छा है। इस रात की फजीलत कुरान मजीद और रसूल मुहम्मद की हदीसों से प्रमाणित है। शबे कद्र को तलाशने का आदेश रसूल ने भी कहा है। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया कि शबे कद्र वाली रात को रमजान महीने के आखिरी दस दिन में (21, 23, 25,27, 29) की रातों में होती है। नबी ए करीम ने इस रात की कुछ निशानी बयान फरमाई है, जैसे कि यह रात बहुत रोशनी वाली होगी। इस रात में न तो बहुत गर्मी होगी और न ही सर्दी होगी। यह रात बहुत संतुलित रात होगी। इसी तरह शबे क़द्र की सुबह का सूरज जब निकलता है तो रोशनी धीमी होती है। रात में ख़ूब इबादत करनी चाहिए और अल्लाह ताला के सामने रातों को उठकर अपने और अपनों के लिए दुआएं मांगनी चाहिए।
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अग्रवाल मंडी टटीरी। हाफिज कासिम अहमद ने कहा कि रमजान का मुबारक महीना चल रहा है। इसमें इंसानों को बहुत से तोहफे दिए गए जैसे कुरान इसी महीने में नाजिल हुआ (उतरा) है। इस महीने में तरावीह का एहतमाम भी किया जाता है। रमजान का सबसे बड़ा तोहफा इस महीने में शबे कद्र का दिया गया। शबे कद्र की रात में नसीब लिखे जाते हैं।
नबी मोहम्मद साहब से उनके साथियों ने कहा कि पहले लोगों की उम्र तो बहुत ज्यादा होती थी। इस हिसाब से उनके पुण्य भी ज्य़ादा होंगे। कयामत के दिन उनका दर्जा हम से बढ़ा हुआ होगा। इसके जवाब में अल्लाह ताला ने शबे कद्र इनायत फरमाई। शबे कद्र यानि रमजान महीने में एक रात ऐसी भी आती है, जो हजार महीने की रात से बेहतर होती है। शबे कद्र की रात लोगों के नसीब लिखी जानी वाली रात होती है। शबे कद्र की रात की इबादत हजार महीनों (83 वर्ष 4 महीने) की इबादतों से बेहतर और अच्छा है। इस रात की फजीलत कुरान मजीद और रसूल मुहम्मद की हदीसों से प्रमाणित है। शबे कद्र को तलाशने का आदेश रसूल ने भी कहा है। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया कि शबे कद्र वाली रात को रमजान महीने के आखिरी दस दिन में (21, 23, 25,27, 29) की रातों में होती है। नबी ए करीम ने इस रात की कुछ निशानी बयान फरमाई है, जैसे कि यह रात बहुत रोशनी वाली होगी। इस रात में न तो बहुत गर्मी होगी और न ही सर्दी होगी। यह रात बहुत संतुलित रात होगी। इसी तरह शबे क़द्र की सुबह का सूरज जब निकलता है तो रोशनी धीमी होती है। रात में ख़ूब इबादत करनी चाहिए और अल्लाह ताला के सामने रातों को उठकर अपने और अपनों के लिए दुआएं मांगनी चाहिए।
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