{"_id":"614a28108ebc3ea80a3d4227","slug":"self-help-group-women-becoming-self-reliant-baghpat-news-mrt556895283","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्मनिर्भर बन नहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आत्मनिर्भर बन नहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमीनगर सराय (बागपत)। बसौद गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आत्म निर्भर बन रही हैं। गांव की महिलाएं घरेलू कार्य के साथ-साथ अब सरकार से मिले अनुदान से खेती में भी अपने हाथ आजमा रही है। गांव की महिलाएं गन्ना, ज्वार, मक्का और सब्जी की खेती कर अपनी आजीविका चला रही है। गांव में फिलहाल 15 स्वयं सहायता समूह है। समूह की महिलाएं कारपेट बनाने से लेकर फसलें उगा रही है। गांव में 2017 से पहले समूह का गठन किया गया था। अब गांव में 60 स्वयं सहायता समूह है।
गांव के चंडी देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुरेखा ने बताया कि उसने स्वयं सहायता समूह की धनराशि से उसने एक एकड़ में धान की खेती उगाई।
माता वैष्णो देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष निर्मला ने बताया कि उसने एक एकड़ भूमि उगाही पर देकर भिंडी की फसल उगाई। खेत में 20 से 25 क्विंटल भिंडी की पैदावार हुई। उसने सब्जी का औसतन दाम करीब 20 रु प्रति किलो मिला है।
चांदनी समूह ने गांव में गन्ने की खेती कर रही है। इसके अलावा गांव के कई सहायता समूह दरी, चटाई, पायदान, कालीन व अन्य रोजगार में लगी हुई है।
विज्ञापन
गांव के चंडी देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुरेखा ने बताया कि उसने स्वयं सहायता समूह की धनराशि से उसने एक एकड़ में धान की खेती उगाई।
माता वैष्णो देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष निर्मला ने बताया कि उसने एक एकड़ भूमि उगाही पर देकर भिंडी की फसल उगाई। खेत में 20 से 25 क्विंटल भिंडी की पैदावार हुई। उसने सब्जी का औसतन दाम करीब 20 रु प्रति किलो मिला है।
विज्ञापन
चांदनी समूह ने गांव में गन्ने की खेती कर रही है। इसके अलावा गांव के कई सहायता समूह दरी, चटाई, पायदान, कालीन व अन्य रोजगार में लगी हुई है।