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Baghpat News: गेहूं की फसल को रोगों से बचाने को बीजोपचार व मिट्टी की जांच जरूरी
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फोटो नंबर 23 केएआर 1
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को फसल रोगों से बचाव की जानकारी दी गई। शिविर में बृहस्पतिवार को पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डा. शिवम सिंह ने किसानों को गेहूं में लगने वाले प्रमुख रोगों जैसे रतुआ, कंडुआ, मृदुरोमिल आसिता के बारे में जानकारी देकर बचाव के तरीके बताए।
उन्होंने कहा कि फसल में रोग दिखने पर समय रहते प्रबंधन करें। फसल में मुख्य रूप से रोग मिट्टी, बीज व हवा के माध्यम से फैलते हैं। फसलों काे रोगों से बचाने के लिए बीज उपचार करना चाहिए। इससे बीज जनित कंडुआ रोग से बचाव होता है। ट्राइकोडर्मा पाउडर का 4 से 5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से या बाविस्टीन या थिरम का 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से इस्तेमाल करना चाहिए। मृदा की जांच करानी भी आवश्यक है। फसलों में आवश्यक्ता के अनुसार खाद, पोषक तत्व एवं दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे मृदाजनित रोगों से छुटकारा मिलता है। फसलों को रोग जनक से बचाने के लिए खेत के आसपास खड़ी खरपतवारों को साफ करते रहना चाहिए। बताया कि जरूरत से ज्यादा हानिकारक कीटनाशकों एवं कवकनाशकों का इस्तेमाल करने से फसलों के साथ ही मनुष्य की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। जैविक विधि में उपयोग होने वाले विभिन्न कारकों गंध पाश (फेरोमोन ट्रैप), लाइट ट्रैप, स्टिकी ट्रैप (चिपचिपा कार्ड), जैव कीटनाशकों व कवकनाशको आदि का प्रयोग करना चाहिए। इस दौरान केन्द्र प्रभारी डा. लक्ष्मीकांत, गौरव शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार, किसान बालकिशोर, संजय कुमार, अरुण, सोनू सिंह, मनोज कुमार, रविंद्र, महेश आदि शामिल रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को फसल रोगों से बचाव की जानकारी दी गई। शिविर में बृहस्पतिवार को पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डा. शिवम सिंह ने किसानों को गेहूं में लगने वाले प्रमुख रोगों जैसे रतुआ, कंडुआ, मृदुरोमिल आसिता के बारे में जानकारी देकर बचाव के तरीके बताए।
उन्होंने कहा कि फसल में रोग दिखने पर समय रहते प्रबंधन करें। फसल में मुख्य रूप से रोग मिट्टी, बीज व हवा के माध्यम से फैलते हैं। फसलों काे रोगों से बचाने के लिए बीज उपचार करना चाहिए। इससे बीज जनित कंडुआ रोग से बचाव होता है। ट्राइकोडर्मा पाउडर का 4 से 5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से या बाविस्टीन या थिरम का 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से इस्तेमाल करना चाहिए। मृदा की जांच करानी भी आवश्यक है। फसलों में आवश्यक्ता के अनुसार खाद, पोषक तत्व एवं दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे मृदाजनित रोगों से छुटकारा मिलता है। फसलों को रोग जनक से बचाने के लिए खेत के आसपास खड़ी खरपतवारों को साफ करते रहना चाहिए। बताया कि जरूरत से ज्यादा हानिकारक कीटनाशकों एवं कवकनाशकों का इस्तेमाल करने से फसलों के साथ ही मनुष्य की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। जैविक विधि में उपयोग होने वाले विभिन्न कारकों गंध पाश (फेरोमोन ट्रैप), लाइट ट्रैप, स्टिकी ट्रैप (चिपचिपा कार्ड), जैव कीटनाशकों व कवकनाशको आदि का प्रयोग करना चाहिए। इस दौरान केन्द्र प्रभारी डा. लक्ष्मीकांत, गौरव शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार, किसान बालकिशोर, संजय कुमार, अरुण, सोनू सिंह, मनोज कुमार, रविंद्र, महेश आदि शामिल रहे।
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