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सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया
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सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया
बड़ौत। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर सरकार द्वारा बैंकों के मर्जर करने के विरोध में बड़ौत तहसील के बैंककर्मियों ने सिंडिकेट बैंक की मुख्य शाखा पर प्रदर्शन कर आक्रोश जताया।
मंगलवार को बैंक कर्मचारी यूएफबीयू के संयोजक विक्रम सिंह आर्य, सचिन, भूपेंद्र के संयुक्त नेतृत्व में एकत्रित हुए और प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। उन्होंने बैंकों को मर्ज करने सहित सरकार की अन्य नीतियों पर रोष जताया। उन्होंने बैंकों के मर्ज करने के फैसले को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद बैंककर्मियों की बैठक हुई। इसमें बैंक मैनेजर हुरमेंद्र और सचिन ने बताया कि नोटबंदी के बाद से लगातार देश के उत्पादक करने वाली यूनिट बंद होने लगी थी। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसीज ने देश की जीडीपी दो प्रतिशत कम होने की घोषणा कर दी थी। इसके फलस्वरूप देश का आयात बढ़ने लगा और देश की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी। आरबीआई को रिजर्व फंड लेने के बाद भी आर्थिक नियंत्रण करने वाली संस्थाएं आश्वत नहीं है कि देश में आर्थिक व्यवस्था आगे बढ़ेगी। देश में बैंकों को प्राईवेट हाथों में देकर सरकार जनता के साथ धोखा कर रही है। इस समय बैंकों में भर्तियां करके रोजगार देने की जरूरत थी। लेकिन सरकार रोजगार कम करने वाली घोषणाएं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बैंककर्मी अपनी मांगों को मनवाने तक संघर्ष करते रहेगें। इस अवसर पर सचिन, भूपेंद्र, बिजेंद्र कुमार, हुरमेंद्र कुमार, संतपाल सिंह, सचिन कुमार, हर्षवर्धन, देवेंद्र कुमार, अर्जुन, अशोक, संदीप, भूपेंद्र कुमार, राजकुमार, नीरज, अधीर कुमार, आकाश, प्रदीप यादव, डीके जैन आदि शामिल थे।
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बड़ौत। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर सरकार द्वारा बैंकों के मर्जर करने के विरोध में बड़ौत तहसील के बैंककर्मियों ने सिंडिकेट बैंक की मुख्य शाखा पर प्रदर्शन कर आक्रोश जताया।
मंगलवार को बैंक कर्मचारी यूएफबीयू के संयोजक विक्रम सिंह आर्य, सचिन, भूपेंद्र के संयुक्त नेतृत्व में एकत्रित हुए और प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। उन्होंने बैंकों को मर्ज करने सहित सरकार की अन्य नीतियों पर रोष जताया। उन्होंने बैंकों के मर्ज करने के फैसले को वापस लेने की मांग की।
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प्रदर्शन के बाद बैंककर्मियों की बैठक हुई। इसमें बैंक मैनेजर हुरमेंद्र और सचिन ने बताया कि नोटबंदी के बाद से लगातार देश के उत्पादक करने वाली यूनिट बंद होने लगी थी। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसीज ने देश की जीडीपी दो प्रतिशत कम होने की घोषणा कर दी थी। इसके फलस्वरूप देश का आयात बढ़ने लगा और देश की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी। आरबीआई को रिजर्व फंड लेने के बाद भी आर्थिक नियंत्रण करने वाली संस्थाएं आश्वत नहीं है कि देश में आर्थिक व्यवस्था आगे बढ़ेगी। देश में बैंकों को प्राईवेट हाथों में देकर सरकार जनता के साथ धोखा कर रही है। इस समय बैंकों में भर्तियां करके रोजगार देने की जरूरत थी। लेकिन सरकार रोजगार कम करने वाली घोषणाएं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बैंककर्मी अपनी मांगों को मनवाने तक संघर्ष करते रहेगें। इस अवसर पर सचिन, भूपेंद्र, बिजेंद्र कुमार, हुरमेंद्र कुमार, संतपाल सिंह, सचिन कुमार, हर्षवर्धन, देवेंद्र कुमार, अर्जुन, अशोक, संदीप, भूपेंद्र कुमार, राजकुमार, नीरज, अधीर कुमार, आकाश, प्रदीप यादव, डीके जैन आदि शामिल थे।
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