पंचायत चुनाव : ब्लॉक प्रमुखों पद का आरक्षण भी नहीं बदला, बनी असमंजस की स्थिति
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उत्तर प्रदेश के बागपत में हाईकोर्ट के आदेश के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण की सूची शासन ने नए सिर से बुधवार शाम जारी की थी। जिला पंचायत अध्यक्ष की तरह ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण में भी कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया। हालांकि शासन की ओर से जारी सूची में ब्लॉकों का नाम अंकित नहीं है। इसे लेकर दावेदार असमंजस की स्थिति में हैं। अधिकारी दो दिन में अनंतिम सूची जारी करने का दावा कर रहे हैं। इसके बाद आपत्तियां ली जाएंगी।
पंचायत चुनाव की पूर्व में जारी आरक्षण प्रक्रिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मार्च को रोक लगा दी थी। साथ ही सरकार को 1995 की बजाय 2015 को आधार वर्ष मानते हुए आरक्षण सूची नए सिरे से जारी करने के आदेश दिए थे।
बुधवार शाम शासन की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के आरक्षण की जारी सूची में कोई बदलाव नहीं दिखाई दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पहले की तरह अभी भी अनुसूचित जाति की महिला के लिए ही आरक्षित रखा गया है। ब्लॉक प्रमुखों के पद का आरक्षण भी नहीं बदला है।
शासन की ओर से जारी की गई नई सूची में जिले के छह ब्लॉकों में एक पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए, एक पिछड़ा वर्ग महिला के लिए और एक पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि तीन पद अनारक्षित रखे गए हैं। इस सूची में किसी ब्लॉक के नाम का भी उल्लेख नहीं है। ऐसे में यह भी असमंजस बना है कि आरक्षण में कोई बदलाव हुआ है या नहीं।
बता दें पूर्व में 1995 को आधार वर्ष मानते हुए जारी की गई सूची में बिनौली ब्लॉक प्रमुख पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए, बड़ौत ब्लॉक प्रमुख पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए और खेकड़ा ब्लॉक प्रमुख पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था। जबकि पिलाना, बागपत और छपरौली को अनारक्षित रखा गया था। डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र का कहना है कि अभी इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता, हम दो दिन में अनंतिम सूची के प्रकाशन की तैयारियों में जुटे हैं।