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जीने की कला सिखाता है धर्म
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:08 AM IST
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मुन्नालाल एंक्लेव में जैन मुनियों की आरती करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जैन मुनि आचार्य विराग सागर और उनके शिष्य जैन मुनि विहर्ष सागर जी महाराज ने 81 संतों के साथ शहर में मंगल प्रवेश किया। आचार्य श्री ने कहा संसार रूपी वैतरणी को केवल धर्म के नाम से ही पार किया जा सकता है।
शहर में बृहस्पतिवार को जैन संतों के समूह ने मंगल प्रवेश किया। उनका बैंडबाजे से स्वागत किया । जैन इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने विभिन्न धार्मिक गीतों के साथ उन्हें जैन मंदिर में लाया गया। दिगंबर जैन धर्मशाला में मुनिराजों के समूह आहार का आयोजन किया ।
समाज के लोगों ने जगह-जगह आरती कर पूजा अर्चना की। फूलों से उनका स्वागत किया। आचार्य विराग सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तव में धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। जब कभी हमारे जीवन में विसंगति आती है तो केवल धर्म के मार्ग पर चलकर हम उसे दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा लाखों योनियों में विचरण करने के बाद बड़े पुण्य कर्म के उदय से हमें मानव शरीर प्राप्त होता है।
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धर्म के बताए मार्ग पर चलकर हम अपने इस भव को भी सार्थक करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल धर्म के मार्ग पर चलकर ही हम संसार रूपी वैतरणी को पार कर सकते हैं। इसमें प्रहलाद जैन, आनंद जैन, शिखर चंद जैन, राकेश मित्तल, प्रमोद जैन, पंडित हंसराज जैन, अशोक कुमार, मयंक जैन, सुनील जैन चक्की वाले, जिनेंद्र जैन, शिवकुमार गुप्ता, अनिल जैन मौजूद रहे। शहर में मंगल प्रवेश के बाद जैन संतों का जत्था सरुरपुर कलां के लिए पद विहार किया। जहां से वह धर्म नगरी बड़ौत में जाएंगे। जैन संतों का बीच रास्तों में समाज के लोगों ने स्वागत किया।
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शहर में बृहस्पतिवार को जैन संतों के समूह ने मंगल प्रवेश किया। उनका बैंडबाजे से स्वागत किया । जैन इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने विभिन्न धार्मिक गीतों के साथ उन्हें जैन मंदिर में लाया गया। दिगंबर जैन धर्मशाला में मुनिराजों के समूह आहार का आयोजन किया ।
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समाज के लोगों ने जगह-जगह आरती कर पूजा अर्चना की। फूलों से उनका स्वागत किया। आचार्य विराग सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तव में धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। जब कभी हमारे जीवन में विसंगति आती है तो केवल धर्म के मार्ग पर चलकर हम उसे दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा लाखों योनियों में विचरण करने के बाद बड़े पुण्य कर्म के उदय से हमें मानव शरीर प्राप्त होता है।
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धर्म के बताए मार्ग पर चलकर हम अपने इस भव को भी सार्थक करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल धर्म के मार्ग पर चलकर ही हम संसार रूपी वैतरणी को पार कर सकते हैं। इसमें प्रहलाद जैन, आनंद जैन, शिखर चंद जैन, राकेश मित्तल, प्रमोद जैन, पंडित हंसराज जैन, अशोक कुमार, मयंक जैन, सुनील जैन चक्की वाले, जिनेंद्र जैन, शिवकुमार गुप्ता, अनिल जैन मौजूद रहे। शहर में मंगल प्रवेश के बाद जैन संतों का जत्था सरुरपुर कलां के लिए पद विहार किया। जहां से वह धर्म नगरी बड़ौत में जाएंगे। जैन संतों का बीच रास्तों में समाज के लोगों ने स्वागत किया।