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Baghpat News: बालूशाही की जीआई टैगिंग के लिए होगा पंजीकरण
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बागपत। बागपत की मशहूर बालूशाही की जीआई टैगिंग कराने की प्रक्रिया शुरू कराई जा रही हैं और इसके लिए पंजीकरण कराया जाएगा। वहीं जीआई टैग प्राप्त धान तथा रटौल आम का विदेश में निर्यात के लिए रणनीति बनाई गई, ताकि किसानों को अच्छा मूल्य मिले।
बागपत की बालूशाही पश्चिमी उप्र तथा दिल्ली-हरियाणा तक मशहूर है। कुछ माह पहले जिला प्रशासन ने बालूशाही को जीआई टैग (जीओग्राफिकल इंडीकेटर) दिलाने पर जोर दिया था। इसे अब अंजाम तक पहुंचाने को कृषि निर्यात एवं जीआई टैगिंग की बैठक में बालूशाही की जीआई टैग दिलाने को सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मानवेंद्र सिंह को शुल्क जमा कराकर पंजीकरण करवाने का जिम्मा सौंपा गया है।
जीआई टैग पाने को पंजीकरण कंट्रोलर जनरल आफ पेंटेंट्स, डिसिजन एंड ट्रेड मार्क संस्था के कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा। इसका मुख्यालय चेन्नई में है। यह संस्था आवेदन की जांच कराती हैं। दावा सही और मानक पूरे मिलने पर जीआई टैग मिल जाता है।
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जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बैठक के जारी कार्यवृत्त में कहा कि बागपत का बासमती धान व रटौल आम जीआई टैग है। बासमती धान तथा रटौल आम का विदेश में निर्यात कराने के लिए किसानों के पांच-पांच कलस्टर गठित हैं। इन दोनों उत्पादों का निर्यात कराने को किसानों को हॉर्टीनेट पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। इसके लिए कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग से आइडी एवं पासवर्ड प्राप्त करने की कार्रवाई शुरू की है।
डीडीओ अखिलेश कुमार चौबे ने ज्यादा किसानाें का पंजीकरण कराने के लिए निर्देश दिया। साफ है कि बासमती धान तथा रटौल आम का निर्यात होने पर किसानों को ज्यादा आमदनी प्राप्त होगी। बागपत में छह हजार हेक्टेयर में अच्छी प्रजाति की सुगंधित बासमती की खेती होती हैं। रटौल गांव में रटौल आम पैदा होता जो अपने लजीज स्वाद और खुशबू के लिए मशहूर है।
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बागपत की बालूशाही पश्चिमी उप्र तथा दिल्ली-हरियाणा तक मशहूर है। कुछ माह पहले जिला प्रशासन ने बालूशाही को जीआई टैग (जीओग्राफिकल इंडीकेटर) दिलाने पर जोर दिया था। इसे अब अंजाम तक पहुंचाने को कृषि निर्यात एवं जीआई टैगिंग की बैठक में बालूशाही की जीआई टैग दिलाने को सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मानवेंद्र सिंह को शुल्क जमा कराकर पंजीकरण करवाने का जिम्मा सौंपा गया है।
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जीआई टैग पाने को पंजीकरण कंट्रोलर जनरल आफ पेंटेंट्स, डिसिजन एंड ट्रेड मार्क संस्था के कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा। इसका मुख्यालय चेन्नई में है। यह संस्था आवेदन की जांच कराती हैं। दावा सही और मानक पूरे मिलने पर जीआई टैग मिल जाता है।
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जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बैठक के जारी कार्यवृत्त में कहा कि बागपत का बासमती धान व रटौल आम जीआई टैग है। बासमती धान तथा रटौल आम का विदेश में निर्यात कराने के लिए किसानों के पांच-पांच कलस्टर गठित हैं। इन दोनों उत्पादों का निर्यात कराने को किसानों को हॉर्टीनेट पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। इसके लिए कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग से आइडी एवं पासवर्ड प्राप्त करने की कार्रवाई शुरू की है।
डीडीओ अखिलेश कुमार चौबे ने ज्यादा किसानाें का पंजीकरण कराने के लिए निर्देश दिया। साफ है कि बासमती धान तथा रटौल आम का निर्यात होने पर किसानों को ज्यादा आमदनी प्राप्त होगी। बागपत में छह हजार हेक्टेयर में अच्छी प्रजाति की सुगंधित बासमती की खेती होती हैं। रटौल गांव में रटौल आम पैदा होता जो अपने लजीज स्वाद और खुशबू के लिए मशहूर है।