कांच की बोतलों का बादशाह है रविंद्र
चौगामा क्षेत्र के गांव निरपुड़ा का परचून दुकानदार रविंद्र अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराना चाहता है। हरकिशोर शर्मा का 25 साल का बेटा रविंद्र पूरे गांव में कांच की बोतल वाला लड़का नाम से जाना जाता है। तीन साल की उम्र से वह गली-मोहल्लों से इकट्ठी कर कांच की बोतलें घर में भर रहा है।
इनमें शराब की खाली बोतलें भी हैं। हरकिशोर शर्मा के घर में जिस तरफ भी आपकी नजर जाएगी, वहां बोतलें ही दिखेंगी। परिवार रविंद्र की आदत से नाराज है। बोतलें इकट्ठी करने के शौक को कुछ लोग उसकी सनक कहते हैं, लेकिन रविंद्र को इन सबकी परवाह नहीं है।
वह कहता है कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की उसकी इच्छा है। वह कहता है कि एक दिन उसके पास दुनिया में सबसे ज्यादा बोतलें होंगी। जिक्र छिड़ते ही वह रजिस्टर खोल लेता है। उसका दावा है कि उसके पास अब तक पांच लाख 238 बोतलें इकट्ठी हो चुकी हैं।
रविंद्र के पिता हरकिशोर ब्लॉक में गाड़ी पर चालक थे। अब रिटायर्ड हो चुके हैं। छह बहन-भाई में रविंद्र तीसरे नंबर का है। रविंद्र की मां उर्मिला ने बताया कि वह तीन साल की उम्र से ही बोतलें एकत्र करने में लगा है। उसने बोलना सात साल की उम्र में सीखा था। वह हाईस्कूल फेल है।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?
सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश राजपूत कहते हैं कि रविंद्र ने बोतलें जमा करने को जीवन का उद्देश्य बना लिया है। बोतलों के प्रति उसके मन में ललक है। परिवार उसे रोकना भी चाहेगा तो वह नहीं सुनेगा। अन्य कुछ लोगों में नोट, सिक्के, आभूषण और अन्य चीजों को एकत्र करने का शौक अक्सर पाया जाता है। रविंद्र को पढ़ा चुके शिक्षक देशपाल राणा का कहना है कि वह सामान्य छात्र है। बोतलों को लेकर उसमें जुनून है।