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Baghpat News: लोनिवि के अफसर काम अच्छा बताते रहे, ठेकेदार बजट ठिकाने लगाता रहा
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बागपत। कान्हा गोशाला के निर्माण में भ्रष्टाचार उजागर होने के साथ ही लोनिवि के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का भी खुलासा हो गया है। लोनिवि के अधिकारी सब कुछ अच्छा बताते रहे और ठेकेदार बजट को ठिकाने लगाता रहा। वहीं गोशाला निर्माण में स्थिति को देखकर साफ लग रहा है कि वहां बड़ा घपला किया गया है। अब अन्य निर्माण कार्यों पर भी अफसरों की नजर है।
अग्रवाल मंडी टटीरी में 1.61 करोड़ रुपये से बनने वाली कान्हा गोशाला के निर्माण में जहां ठेकेदार ने खेल किया, वहीं लोक निर्माण विभाग के अफसर भी खेल में पीछे नहीं रहे। वहां तैनात अवर अभियंता कुलदीप कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन्होंने सही से निगरानी नहीं की और न ही उच्चाधिकारियों को ठेकेदार के गोलमाल की रिपोर्ट बनाकर भेजी। इसके अलावा निरीक्षण करने वाले अन्य अधिकारियों ने भी गोशाला के निर्माण में गड़बड़ी को दबाए रखा और उच्चाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। इसका नतीजा यह रहा है कि ठेकेदार को निर्माण का बजट जारी कर दिया गया। वहीं ठेकेदार ने समय पर कार्य पूर्ण नहीं कराया और जो काम कराया गया, वह मानकों के अनुरूप नहीं है।
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कान्हा गोशाला निर्माण में यह मिली कमियां
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने वहां का कई दिन पहले निरीक्षण किया था। वहां उनको कान्हा गोशाला में चारा गोदाम की दीवार का निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं मिला और फर्श भी क्षतिग्रस्त स्थिति में मिला। इसके अलावा 500 पशुओं के लिए बनाया गया शेड 100 पशुओं के लिए भी पर्याप्त नहीं मिला। भूसा कटर शेड, मुख्य द्वार, चरही, नाली निर्माण कार्य नहीं कराया गया। बायोगैस प्लांट का निर्माण और पांच केवीए जनरेटर शुरू नहीं किया गया। इसके अलावा बाउंड्रीवाल भी क्षतिग्रस्त और पिलरों में दरार मिली। पशुओं के लिए लगाया गया खड़ंजा भी सहीं नहीं मिला।
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अग्रवाल मंडी टटीरी में 1.61 करोड़ रुपये से बनने वाली कान्हा गोशाला के निर्माण में जहां ठेकेदार ने खेल किया, वहीं लोक निर्माण विभाग के अफसर भी खेल में पीछे नहीं रहे। वहां तैनात अवर अभियंता कुलदीप कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन्होंने सही से निगरानी नहीं की और न ही उच्चाधिकारियों को ठेकेदार के गोलमाल की रिपोर्ट बनाकर भेजी। इसके अलावा निरीक्षण करने वाले अन्य अधिकारियों ने भी गोशाला के निर्माण में गड़बड़ी को दबाए रखा और उच्चाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। इसका नतीजा यह रहा है कि ठेकेदार को निर्माण का बजट जारी कर दिया गया। वहीं ठेकेदार ने समय पर कार्य पूर्ण नहीं कराया और जो काम कराया गया, वह मानकों के अनुरूप नहीं है।
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कान्हा गोशाला निर्माण में यह मिली कमियां
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने वहां का कई दिन पहले निरीक्षण किया था। वहां उनको कान्हा गोशाला में चारा गोदाम की दीवार का निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं मिला और फर्श भी क्षतिग्रस्त स्थिति में मिला। इसके अलावा 500 पशुओं के लिए बनाया गया शेड 100 पशुओं के लिए भी पर्याप्त नहीं मिला। भूसा कटर शेड, मुख्य द्वार, चरही, नाली निर्माण कार्य नहीं कराया गया। बायोगैस प्लांट का निर्माण और पांच केवीए जनरेटर शुरू नहीं किया गया। इसके अलावा बाउंड्रीवाल भी क्षतिग्रस्त और पिलरों में दरार मिली। पशुओं के लिए लगाया गया खड़ंजा भी सहीं नहीं मिला।
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