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पर्यटकों को लुभाता है इतिहास समेटे पुरा महादेव मंदिर
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पुरामहादेव मंदिर
- फोटो : BAGHPAT
विश्व पर्यटन दिवस :
- धार्मिक फिल्मों और भजनों की शूटिंग के लिए भव्य क्षेत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। पुरा गांव के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। कांवड़ यात्रा में कईं राज्यों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। पर्यटकों को यह पूरा क्षेत्र खूब लुभाता है। फिल्म सिटी बन जाने के बाद एनसीआर में पुरा महादेव मंदिर धार्मिक फिल्मों और भजनों की शूटिंग के लिए निर्माताओं को आकर्षित करने में कामयाब होगा। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा और युवाओं के सामने भी विकल्प खुलेंगे। नोएडा के नजदीक होने और क्षेत्र में एक से बढ़कर एक लोकेशन निर्माताओं को आकर्षित करेगी। हिंडन नदी किनारे के इस क्षेत्र में पर्याप्त संभावना है।
फूलों के शृंगार ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान
बागपत। एतिहासिक शिवलिंग पर फूलों के शृंगार की पहल की गई है। इससे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसके अलावा कोरोना काल में 1000 दीपक से रोशनी भी की गई थी।
इसलिए खास है पुरा महादेव
बागपत। बुजुर्ग बताते हैं कि हिंडन नदी के किनारे कजरी वन में ऋषि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ रहते थे। एक दिन हस्तिनापुर के राजा सहस्रबाहु शिकार खेलते हुए कजरी वन पहुंचे। राजा कुटिया पर रेणुका के रूप को देखकर मोहित होकर उसे जबरन अपने साथ हस्तिनापुर ले गए। एक दिन बाद रेणुका बंधनमुक्त होकर दोबारा कजरी वन पहुंची तो ऋषि ने यह कहते हुए रखने से इंकार कर दिया कि वह परपुरुष के साथ रहकर आई है। रेणुका नहीं मानी। ऋषि ने अपने चारों बेटों को बुलाया और अपनी मां का सिर धड़ से अलग करने का आदेश सुना दिया। तीन बेटे पीछे हट गए, लेकिन चौथे बेटे परशुराम ने मां का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन जमीन पर पड़े मां के सिर को देख परशुराम विचलित हो गया। वहीं पर बैठकर शिव की तपस्या शुरू कर दी। शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए। परशुराम ने अपनी मां को दोबारा जिंदा कराने का वचन मांगा। बताते हैं कि भगवान शिव ने परशुराम को फरसा दिया। इसी फरसे से परशुराम ने राजा सहस्रबाहु का वध किया।
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यह भी जानिए
बागपत। श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर को लेकर लोककथा प्रचलित हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि लंढौरा की राजकुमार वन में घूमने आई। हाथी जंगल में आकर रुक गया, सेना ने आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया, लेकिन हाथी आगे नहीं बढ़ा। राजकुमार ने जगह की खुदाई के आदेश दिए। कथा है कि यहां पर खुदाई से शिवलिंग निकला। यह वही शिवलिंग है जो मंदिर में वर्तमान में विराजमान है। यहीं पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी कभी तपस्या की थी।
क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आना जाना रहता है। फिल्म सिटी अगर बनती है तो पुरा महादेव ही नहीं बल्कि पश्चिम यूपी के अन्य धार्मिक स्थलों पर कलाकारों और पर्यटकों की आवाजाही और बढ़ेगी। - जयभगवान शर्मा, मुख्य पुजारी, पुरा महादेव मंदिर।
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- धार्मिक फिल्मों और भजनों की शूटिंग के लिए भव्य क्षेत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। पुरा गांव के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। कांवड़ यात्रा में कईं राज्यों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। पर्यटकों को यह पूरा क्षेत्र खूब लुभाता है। फिल्म सिटी बन जाने के बाद एनसीआर में पुरा महादेव मंदिर धार्मिक फिल्मों और भजनों की शूटिंग के लिए निर्माताओं को आकर्षित करने में कामयाब होगा। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा और युवाओं के सामने भी विकल्प खुलेंगे। नोएडा के नजदीक होने और क्षेत्र में एक से बढ़कर एक लोकेशन निर्माताओं को आकर्षित करेगी। हिंडन नदी किनारे के इस क्षेत्र में पर्याप्त संभावना है।
फूलों के शृंगार ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान
बागपत। एतिहासिक शिवलिंग पर फूलों के शृंगार की पहल की गई है। इससे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसके अलावा कोरोना काल में 1000 दीपक से रोशनी भी की गई थी।
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इसलिए खास है पुरा महादेव
बागपत। बुजुर्ग बताते हैं कि हिंडन नदी के किनारे कजरी वन में ऋषि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ रहते थे। एक दिन हस्तिनापुर के राजा सहस्रबाहु शिकार खेलते हुए कजरी वन पहुंचे। राजा कुटिया पर रेणुका के रूप को देखकर मोहित होकर उसे जबरन अपने साथ हस्तिनापुर ले गए। एक दिन बाद रेणुका बंधनमुक्त होकर दोबारा कजरी वन पहुंची तो ऋषि ने यह कहते हुए रखने से इंकार कर दिया कि वह परपुरुष के साथ रहकर आई है। रेणुका नहीं मानी। ऋषि ने अपने चारों बेटों को बुलाया और अपनी मां का सिर धड़ से अलग करने का आदेश सुना दिया। तीन बेटे पीछे हट गए, लेकिन चौथे बेटे परशुराम ने मां का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन जमीन पर पड़े मां के सिर को देख परशुराम विचलित हो गया। वहीं पर बैठकर शिव की तपस्या शुरू कर दी। शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए। परशुराम ने अपनी मां को दोबारा जिंदा कराने का वचन मांगा। बताते हैं कि भगवान शिव ने परशुराम को फरसा दिया। इसी फरसे से परशुराम ने राजा सहस्रबाहु का वध किया।
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बागपत। श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर को लेकर लोककथा प्रचलित हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि लंढौरा की राजकुमार वन में घूमने आई। हाथी जंगल में आकर रुक गया, सेना ने आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया, लेकिन हाथी आगे नहीं बढ़ा। राजकुमार ने जगह की खुदाई के आदेश दिए। कथा है कि यहां पर खुदाई से शिवलिंग निकला। यह वही शिवलिंग है जो मंदिर में वर्तमान में विराजमान है। यहीं पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी कभी तपस्या की थी।
क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आना जाना रहता है। फिल्म सिटी अगर बनती है तो पुरा महादेव ही नहीं बल्कि पश्चिम यूपी के अन्य धार्मिक स्थलों पर कलाकारों और पर्यटकों की आवाजाही और बढ़ेगी। - जयभगवान शर्मा, मुख्य पुजारी, पुरा महादेव मंदिर।