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सांस लेने लायक नहीं सुबह-शाम की हवा
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सांस लेने लायक नहीं सुबह - शाम की हवा
बागपत। हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। सुबह और शाम को स्मॉग की चादर बिछी नजर आई । दोपहर के समय हल्की धूप खिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो गुणवत्ता सूचकांक जारी किया है, इसमें बागपत का पीएम 2.5 का औसत एक्यूआई करीब 330 तक दर्शाया है। बोर्ड के अनुसार जिले में हवा सांस लेने लायक नहीं है। मंगलवार सुबह स्मॉग की हल्की चादर सी बिछ गई। हवा में धूल से लोगों की सेहत पर उल्टा असर पड़ सकता है। वायु सूचकांक में रोज परिवर्तन होता है। सुबह और शाम के समय में भी अंतर रहता है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो हवा की रफ्तार अभी कम है, लेकिन अगर हवा की रफ्तार तेज हो गई तो वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा। मौसम में एक जगह जमी धूल और गुबार हट जाएंगे, जिससे प्रदूषण का स्तर कम होगा।
अवैध ईंट भट्ठे भी सेहत के हैं दुश्मन
बागपत। जिलेभर में करीब 550 ईंट भट्ठे हैं। इनमें 400 से अधिक ईंट भट्ठे ऐसे हैं, जिनका संचालन अवैध तरीके से किया जाता है। खेकड़ा और बागपत क्षेत्र में ही कई टायर गलाने के उद्योग चल रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर इनमें टायर गलाकर तेल निकाला जाता है। इनसे भी पर्यावरण की हालत बिगड़ जाती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
बागपत। सीएचसी बागपत के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत कहते हैँ कि सुबह-शाम के समय हवा की गुणवत्ता अभी खराब है। इससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
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बागपत। हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। सुबह और शाम को स्मॉग की चादर बिछी नजर आई । दोपहर के समय हल्की धूप खिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो गुणवत्ता सूचकांक जारी किया है, इसमें बागपत का पीएम 2.5 का औसत एक्यूआई करीब 330 तक दर्शाया है। बोर्ड के अनुसार जिले में हवा सांस लेने लायक नहीं है। मंगलवार सुबह स्मॉग की हल्की चादर सी बिछ गई। हवा में धूल से लोगों की सेहत पर उल्टा असर पड़ सकता है। वायु सूचकांक में रोज परिवर्तन होता है। सुबह और शाम के समय में भी अंतर रहता है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो हवा की रफ्तार अभी कम है, लेकिन अगर हवा की रफ्तार तेज हो गई तो वायु की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा। मौसम में एक जगह जमी धूल और गुबार हट जाएंगे, जिससे प्रदूषण का स्तर कम होगा।
अवैध ईंट भट्ठे भी सेहत के हैं दुश्मन
बागपत। जिलेभर में करीब 550 ईंट भट्ठे हैं। इनमें 400 से अधिक ईंट भट्ठे ऐसे हैं, जिनका संचालन अवैध तरीके से किया जाता है। खेकड़ा और बागपत क्षेत्र में ही कई टायर गलाने के उद्योग चल रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर इनमें टायर गलाकर तेल निकाला जाता है। इनसे भी पर्यावरण की हालत बिगड़ जाती है।
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क्या कहते हैं डॉक्टर
बागपत। सीएचसी बागपत के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत कहते हैँ कि सुबह-शाम के समय हवा की गुणवत्ता अभी खराब है। इससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।