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संसद में अमर्यादित भाषा से लोकतंत्र की आत्मा पर हो रही चोट : राज्यपाल
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बड़ौत के चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल में यज्ञशाला का शिलान्यास करते बिहार के राज्यप
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बड़ौत (बागपत)। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संसद में अमर्यादित भाषा से लोकतंत्र की आत्मा पर चोट हो रही है। अमर्यादित भाषा में नारे लगाए जा रहे हैं। ऐसा करने वालों को जनता जवाब जरूर देगी। वह शुक्रवार को बड़ौत के केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल में यज्ञशाला का शिलान्यास करने पहुंचे थे।
राज्यपाल ने केरल कांग्रेस के जीएसटी को लेकर किए गए ट्वीट बी फॉर बीड़ी और बी फॉर बिहार पर कहा कि यह बीड़ी, पीड़ी बहुत छोटी चीज है। यहां तो संसद में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी पटना में वकीलों की एक सभा थी और देशभर के बड़े वकील आए हुए थे। मैंने वहां कहा कि अगर अदालत में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करें तो क्या उसकी अनुमति दी जाएगी। वहां ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी। जहां कानून के आधार पर न्याय मिलता है, वहां अमर्यादित भाषा की जगह नहीं, मगर जहां संसद में कानून बनता है वहां अमर्यादित भाषा में नारे लगाए जाते हैं।
दुनिया में कोई नहीं कह सकता है कि संसद में इस्तेमाल होने वाली भाषा मर्यादित या सभ्य है। वहां लगाए जाने वाले नारों की संसदीय भाषा भी इजाजत नहीं देती। कहा कि लोकतंत्र लोकलाज के सहारे चलता है। लोकतंत्र मर्यादा का सम्मान करने से चलता है। अपने ऊपर नियंत्रण रखने से चलता है। हमारी इच्छा सत्ता की ऐसी है कि हम किसी मर्यादा का सम्मान नहीं करेंगे तो जनता इसका नोटिस लेगी। मैं मानता हूं कि भारत की जनता लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह का यहां आयोजन हुआ, आमतौर पर लोग उसे वर्ग विशेष या समुदाय विशेष के आयोजन के तौर पर देखते हैं मगर यह सभी का आयोजन है। इस दौरान पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह भी मौजूद रहे।
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राज्यपाल ने केरल कांग्रेस के जीएसटी को लेकर किए गए ट्वीट बी फॉर बीड़ी और बी फॉर बिहार पर कहा कि यह बीड़ी, पीड़ी बहुत छोटी चीज है। यहां तो संसद में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी पटना में वकीलों की एक सभा थी और देशभर के बड़े वकील आए हुए थे। मैंने वहां कहा कि अगर अदालत में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करें तो क्या उसकी अनुमति दी जाएगी। वहां ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी। जहां कानून के आधार पर न्याय मिलता है, वहां अमर्यादित भाषा की जगह नहीं, मगर जहां संसद में कानून बनता है वहां अमर्यादित भाषा में नारे लगाए जाते हैं।
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दुनिया में कोई नहीं कह सकता है कि संसद में इस्तेमाल होने वाली भाषा मर्यादित या सभ्य है। वहां लगाए जाने वाले नारों की संसदीय भाषा भी इजाजत नहीं देती। कहा कि लोकतंत्र लोकलाज के सहारे चलता है। लोकतंत्र मर्यादा का सम्मान करने से चलता है। अपने ऊपर नियंत्रण रखने से चलता है। हमारी इच्छा सत्ता की ऐसी है कि हम किसी मर्यादा का सम्मान नहीं करेंगे तो जनता इसका नोटिस लेगी। मैं मानता हूं कि भारत की जनता लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह का यहां आयोजन हुआ, आमतौर पर लोग उसे वर्ग विशेष या समुदाय विशेष के आयोजन के तौर पर देखते हैं मगर यह सभी का आयोजन है। इस दौरान पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह भी मौजूद रहे।
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