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सरकारी योजनाओं का उठाएं लाभ, चंदन की खेती करें किसान: उप राज्यपाल
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खेकड़ा। विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतिम दिन दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किसानों से संवाद कर खेती में बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार किसानों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं। इनका लाभ उठाकर गन्ना के साथ सहफसली व चंदन की खेती कर किसान खुशहाली की राह चलें। बागपत व बुंदेलखंड में भूजल स्तर नीचे जा रहा है, इसलिए पानी की बर्बादी न करें।
दिल्ली के उप राज्यपाल ने बृहस्पतिवार को कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा में वैज्ञानिकों से गन्ना की नई प्रजातियों की जानकारी ली। वहीं, मवीकलां के एक रिजोर्ट में किसानों से संवाद किया। उन्होंने किसानों से कहा कि रसायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें, जैविक खेती कर मोटा अनाज पैदा करें। मोटे अनाज का सेवन कर खुद के साथ दूसरों को बीमारियों से बचाएं। गन्ना खेती के साथ में आलू या अन्य सहफसली खेती कर ज्यादा आय पाएं। बांस की खेती से अच्छी आय के साथ पर्यावरण संरक्षण होता है। कहा कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए 18 लाख पौधे लगवाए गए हैं।
चंदन की खेती को लेकर कहा कि यह किसानों को खुशहाल बना सकती है। चंदन का पेड़ 10 से 15 साल में तैयार हो जाता है। एक पेड़ की कीमत पंद्रह लाख रुपये है। प्रत्येक किसान चंदन के दो पौधे लगाकर बच्चों की पढ़ाई व शादी की राह आसान बनाएं। किसान मधुमक्खी पालन भी कर सकते हैं। बागपत एवं बुंदेलखंड में भूजल स्तर काफी नीचे पहुंच गया। इसलिए भूजल अतिदोहन से बचें। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टाॅलों का अवलोकन किया। सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने उन्हें तलवार और भगवान श्रीराम की मूर्ति देकर सम्मान किया। इस दौरान जयप्रकाश तोमर, केवीके अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी लक्ष्मीकांत, कृषि उप निदेशक बाल गोविंद यादव, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार अरुण, डा़ विकास मलिक, डा़ शिवम सिंह, विकास धामा, डा़ॅ, ताहिर, संजीव सांगवन, देवेंद्र धामा, राजेश धामा मौजूद रहे।
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कुल्हड़ में चाय पीने से वतन की मिट्टी चूमने का मौका
जैसे ही कुल्हड़ में चाय परोसी गई, वैसे ही उप राज्यपाल बोले कि मुझे बहुत अच्छा लगा। कुल्हड़ में चाय पीने से हमें अपने वतन की मिट्टी चूमने का सौभाग्य मिलता है। इससे कुम्हारों की आय होती है। सरकार ने कुम्हारों के लिए योजनाएं चला रखी है, जिससे उनके जीवन में खुशहाली आ रही है। उप राज्यपाल ने कहा कि बागपत के किसानों के बीच में आक ऐसा लगा कि जैसे अपने घर में आ गया हूं। यहां किसानों ने अपनी समस्या बेहतर ढंग से मिठास के साथ रखी हैं। दरअसल, किसानों ने गन्ना बकाया भुगतान दिलाने की मांग की थी।
भारतीय कल्चर अपना रहे विदेशी
उप राज्यपाल ने कहा कि विदेशी लोग भारत के कल्चर को अपना रहे हैं। मगर दुर्भाग्य की बात है कि भारत के लोग विदेशी कल्चर की ओर दौड़ रहे हैं। यह बहुत घातक है। सभी को स्वदेशी सामान का उपयोग कर भारत को आगे बढ़ाना है।
ट्रैक्टर पर बैठकर किसानों को सौंपी ट्रैक्टरों की चाबी
उप राज्यपाल ने सरकारी योजना से दो किसानों को चाबी देकर ट्रैक्टर सौपें। किसानों के आग्रह पर उपराज्यपाल ट्रैक्टर बैठ गए। ट्रैक्टर पर बैठकर ही ट्रैक्टरों की चाबी सौंपी।
सांसद बोले, यहां पर गन्ना शोध संस्थान लाऊंगाबागपत सांसद डॉ. राजकुमार सागवान ने कहा कि मुझे बागपत के लिए गन्ने का रिसर्च सेंटर लाना है। बागपत में गन्ने सबसे ज्यादा खेती होती है। इसलिए रिसर्च सेंटर यहां जरूरी है।
इन किसानों को मिला सम्मान
उप राज्यपाल ने प्रगतिशील किसान अनुराधा वत्स मीतली, विजय कुमार सुन्हैड़ा, राजेश कुमार खेकड़ा, कपिल आर्य मुकंदपुर, श्याम सिंह बसी, हर्षित कुमार यादव हरियाखेड़ा तथा डीपी सिंह बड़ौत को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
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दिल्ली के उप राज्यपाल ने बृहस्पतिवार को कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा में वैज्ञानिकों से गन्ना की नई प्रजातियों की जानकारी ली। वहीं, मवीकलां के एक रिजोर्ट में किसानों से संवाद किया। उन्होंने किसानों से कहा कि रसायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें, जैविक खेती कर मोटा अनाज पैदा करें। मोटे अनाज का सेवन कर खुद के साथ दूसरों को बीमारियों से बचाएं। गन्ना खेती के साथ में आलू या अन्य सहफसली खेती कर ज्यादा आय पाएं। बांस की खेती से अच्छी आय के साथ पर्यावरण संरक्षण होता है। कहा कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए 18 लाख पौधे लगवाए गए हैं।
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चंदन की खेती को लेकर कहा कि यह किसानों को खुशहाल बना सकती है। चंदन का पेड़ 10 से 15 साल में तैयार हो जाता है। एक पेड़ की कीमत पंद्रह लाख रुपये है। प्रत्येक किसान चंदन के दो पौधे लगाकर बच्चों की पढ़ाई व शादी की राह आसान बनाएं। किसान मधुमक्खी पालन भी कर सकते हैं। बागपत एवं बुंदेलखंड में भूजल स्तर काफी नीचे पहुंच गया। इसलिए भूजल अतिदोहन से बचें। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टाॅलों का अवलोकन किया। सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने उन्हें तलवार और भगवान श्रीराम की मूर्ति देकर सम्मान किया। इस दौरान जयप्रकाश तोमर, केवीके अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी लक्ष्मीकांत, कृषि उप निदेशक बाल गोविंद यादव, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार अरुण, डा़ विकास मलिक, डा़ शिवम सिंह, विकास धामा, डा़ॅ, ताहिर, संजीव सांगवन, देवेंद्र धामा, राजेश धामा मौजूद रहे।
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कुल्हड़ में चाय पीने से वतन की मिट्टी चूमने का मौका
जैसे ही कुल्हड़ में चाय परोसी गई, वैसे ही उप राज्यपाल बोले कि मुझे बहुत अच्छा लगा। कुल्हड़ में चाय पीने से हमें अपने वतन की मिट्टी चूमने का सौभाग्य मिलता है। इससे कुम्हारों की आय होती है। सरकार ने कुम्हारों के लिए योजनाएं चला रखी है, जिससे उनके जीवन में खुशहाली आ रही है। उप राज्यपाल ने कहा कि बागपत के किसानों के बीच में आक ऐसा लगा कि जैसे अपने घर में आ गया हूं। यहां किसानों ने अपनी समस्या बेहतर ढंग से मिठास के साथ रखी हैं। दरअसल, किसानों ने गन्ना बकाया भुगतान दिलाने की मांग की थी।
भारतीय कल्चर अपना रहे विदेशी
उप राज्यपाल ने कहा कि विदेशी लोग भारत के कल्चर को अपना रहे हैं। मगर दुर्भाग्य की बात है कि भारत के लोग विदेशी कल्चर की ओर दौड़ रहे हैं। यह बहुत घातक है। सभी को स्वदेशी सामान का उपयोग कर भारत को आगे बढ़ाना है।
ट्रैक्टर पर बैठकर किसानों को सौंपी ट्रैक्टरों की चाबी
उप राज्यपाल ने सरकारी योजना से दो किसानों को चाबी देकर ट्रैक्टर सौपें। किसानों के आग्रह पर उपराज्यपाल ट्रैक्टर बैठ गए। ट्रैक्टर पर बैठकर ही ट्रैक्टरों की चाबी सौंपी।
सांसद बोले, यहां पर गन्ना शोध संस्थान लाऊंगाबागपत सांसद डॉ. राजकुमार सागवान ने कहा कि मुझे बागपत के लिए गन्ने का रिसर्च सेंटर लाना है। बागपत में गन्ने सबसे ज्यादा खेती होती है। इसलिए रिसर्च सेंटर यहां जरूरी है।
इन किसानों को मिला सम्मान
उप राज्यपाल ने प्रगतिशील किसान अनुराधा वत्स मीतली, विजय कुमार सुन्हैड़ा, राजेश कुमार खेकड़ा, कपिल आर्य मुकंदपुर, श्याम सिंह बसी, हर्षित कुमार यादव हरियाखेड़ा तथा डीपी सिंह बड़ौत को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।