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बागपत में जल हुआ जहरीला

Thu, 14 Oct 2021 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 11:21 PM IST
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Poisonous burnt in Baghpat
काला हुआ रजवाहा का पानी: बागपत के गौरीपुर गांव के जंगल में जींस की फैक्ट्री से कैमिकल के कारण काला - फोटो : BAGHPAT
- जींस रंगाई की फैक्टरियों को गाजियाबाद व लोनी से बाहर यहां अवैध रूप से लगाई
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- दस से ज्यादा फैक्टरियों से प्रतिदिन पांच लाख लीटर रसायन वाला पानी निकल रहा
- प्रशासन, प्रदूषण विभाग, एनजीटी की अनुमति नहीं, रसायनिक पानी से जान को खतरा
- बागपत के पुराने कस्बे में जहरीला हो रहा पानी, लोगों में बढ़ने लगी बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जल को भले ही जीवन कहा जाता हो, लेकिन बागपत में यह जीवन ही जहरीला हो गया है। क्योंकि एनजीटी की सख्ती के बाद गाजियाबाद व लोनी से जिन जींस रंगाई की फैक्टरियों को बंद कराया गया था, उनको अवैध रूप से बागपत में लगा दिया गया है। यहां दस से ज्यादा फैक्टरी होने के कारण प्रतिदिन करीब पांच लाख लीटर केमिकल वाला जहरीला पानी निकलता है और उसको नाले व जमीन पर खुले में छोड़ दिया जाता है, जो भूजल को दूषित कर रहा है। इससे हालात यह हो रहे है कि लोग बीमारियों की चपेट में आने शुरू हो गए है।
प्रशासन, प्रदूषण विभाग की अनुमति तक नहीं, ईटीपी भी नहीं लगा
गाजियाबाद व लोनी से जींस रंगाई की इन फैक्टरियों को इसलिए ही बंद कराया गया था, क्योंकि इनसे वहां का पानी जहरीला हो गया था। हालात यह हो गए थे कि बीमारियां फैलने लगी थी और इसकी शिकायत अधिकारियों व एनजीटी में हुई तो वहां से फैक्टरियां बंद कराई गई। वहां से बंद कराई गई अधिकतर फैक्टरी को करीब एक साल पहले ही यहां लगा दिया गया। इसके लिए प्रशासन व प्रदूषण विभाग से अनुमति तक नहीं ली गई। इनके अलावा फैक्टरी में ईटीपी (इफ्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाना अनिवार्य होता है। इससे केमिकल वाले पानी का ट्रीटमेंट किया जाता और उससे रसायनिक तत्व अलग होने के बाद नाले या जमीन पर छोड़ा जाता है। यहां ईटीपी भी नहीं लगा है और इस कारण ही पानी जहरीला होता जा रहा है।
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जींस रंगाई की फैक्टरी से निकलने वाला कैमिकल खतरनाक: डा. विभाष
सीएचसी बागपत के अधीक्षक डा. विभाष राजपूत बताते है कि जींस रंगाई के लिए खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल होता है। जिस तरह का रंग करना होता है, उसके अनुसार ही अलग-अलग केमिकल इस्तेमाल होते है। इस तरह फैक्टरी में रंगाई के बाद निकलने वाला पानी केमिकल मिला होने से जहरीला होता है और वह नाले या खुली जगह पर सीधे नहीं छोड़ा जा सकता है। अगर उसको ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो उससे भूजल भी जहरीला हो जाएगा और वहां के लोगों के लिए वह काफी खतरनाक होगा। उससे लीवर, आंख, त्वचा रोग के अलावा कैंसर तक हो सकता है।
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पानी काफी दूषित आ रहा है और उसमें बदबू आती है। नल से पानी लेकर आते है तो उसका स्वाद भी बदला हुआ है। केमिकल की बदबू आती है। पानी को उबालकर पीना पड़ रहा है। परिवार में आए दिन कोई न कोई बीमार रहता है और पेट की बीमारी ज्यादा होती है। - दिनेश शर्मा, मुगलपुरा
पहले ही पानी की निकासी की समस्या है। फैक्टरियों का यह पानी खेतों में जाने के कारण केमिकल से फसल खराब हो जाती है। इसके साथ ही आसपास का पानी भी दूषित हो रहा है। सबमर्सिबल में केमिकल की बदबू वाला पानी आता है। - धर्मेंद्र कुमार, देशराज मोहल्ला।
हमारे मोहल्ले के बीच से नाला निकल रहा है, जिसमें फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल का पानी आता है। इससे काफी बदबू आती है और पीने के लिए पानी भी साफ नहीं मिल रहा है। दूषित पानी को पीकर लोगों को चर्म रोग हो रहा है और डाक्टर के पास उपचार कराना पड़ता है। - नासिर अहमद, मुगलपुरा।
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हमारे यहां भी जींस रंगाई की अवैध फैक्टरी चल रही है। हम पहले रजबहे में कपड़ों की धुलाई करने के साथ ही पशुओं को नहला लेते थे। लेकिन अब पानी बिल्कुल काला हो गया है और वह शरीर के लगते ही बीमारी हो जाती है। रजबहे के पास लगे हैंडपंप के पानी से भी केमिकल की बदबू आती है। हमारी जिंदगी नर्क बन गई है। - विकास, गौरीपुर।

बागपत के पुराने कस्बे और गौरीपुर में जींस रंगाई की किसी भी फैक्टरी की अनुमति नहीं है। इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं थी कि यहां ऐसी फैक्टरी लगा दी गई है और उनसे पानी जहरीला हो गया है। इन सभी फैक्टरी पर कार्रवाई करके बंद कराया जाएगा। - अनुभव सिंह, एसडीएम।
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