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हरियाली बिखेरने को पौधरोपण, सहेजने पर नहीं कोई ध्यान

Tue, 16 Jun 2020 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2020 11:24 PM IST
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Planting to spread greenery, no focus on saving
बड़ौत। हरियाली बिखरेने को हर वर्ष मानसून के सीजन में पौधरोपण होता है। मगर, इन पौधे को सहेजने और संरक्षण पर कोई ध्यान नहीं देता। ऐसे में ज्यादातर पौधे पेड़ बनने से पहले ही सूख जाते हैं।
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विश्व पर्यावरण दिवस हो, वन महोत्सव या अन्य अवसर, लोग पौधरोपण में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। मगर, पौधरोपण करने के बाद कोई दोबारा इनकी ओर नहीं देखता। इसके चलते पौधे सूख जाते हैं। खंड विकास मुख्यालय पर गत वर्ष 80 हजार पौधरोपण अभियान के तहत विभिन्न गांवों में लगाए गए थे, जबकि इस बार 92000 हजार का लक्ष्य दिया गया है। वन विभाग की ओर से गत वर्ष 1.05 लाख पौधे रोपे गए थे। मगर, देखरेख के अभाव में 40 प्रतिशत पौधे सूखकर खत्म हो गए है। इस बार वन विभाग का लक्ष्य 1.18 लाख पौधे रोपित करने का है। तहसील क्षेत्र में 25 हजार का लक्ष्य दिया गया है, जबकि गत वर्ष 18 हजार के करीबन था। देखरेख के चलते मात्र 10 प्रतिशत ही पौधे सूखे है, जबकि 90 प्रतिशत पौधे अब पेड़ बन चुके है। इसकेे अलावा नगरपालिका, शिक्षा विभाग, बिजली विभाग, सिंचाई विभाग सहित 24 विभाग है, जो हर साल पौधारोपण करते है, लेकिन देखरेख के अभाव में मात्र 50 फीसदी ही पौधे बच पाते है। इस बार भी पौधरोपण और इनके रख-रखाव पर करोड़ों का बजट खर्च होगा।
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पौध की दरें निर्धारित की गईं
बड़ौत। सभी विभागों को वन विभाग से पौधे खरीदने होंगे। दो फीट का पौधा सात रुपये, तीन फिट का नौ रुपये में बेचा जाएगा। इनमें शीशम, जामुन, आदि के पौधे होंगे।
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कार्य योजना बनाकर किया जाता है पौधारोपण
एसडीएम दुर्गेश मिश्र व वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह ने बताया कि कार्य योजना बनाकर पौधरोपण किया जाता है। पौधरोपण के बाद उनके रख-रखाव, सिंचाई आदि के लिए चार साल की कार्य योजना होती है। पिछले वर्ष रोपे गए ज्यादातर पौधे जीवित हैं। लखनऊ की टीमों ने निरीक्षण कर इस पर संतोष जताया है।
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