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धान की रोपाई में एक स्थान पर दो तीन पौधे लगाए

Fri, 17 Jul 2020 11:03 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2020 11:03 PM IST
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Plant two to three plants at one place in paddy transplanting
कृषि विशेषज्ञों की सलाह, रोपाई के 72 घंटे में कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। मानसून समय पर आने से इस बार धान की फसल अच्छी होने की उम्मीद है। जिले में धान का रकबा एक हजार बीघा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की रोपाई करते समय एक स्थान पर दो से तीन पौधे लगाने चाहिए। फसल को रोग से बचाने के लिए रोपाई के 72 घंटे में कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए।
जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि जिले में सर्वाधिक बासमती धान की रोपाई की जाती है। मानसून समय पर आने से इस बार जिले में धान का रकबा एक हजार बीघा बढ़ गया तथा बंपर फसल होने की उम्मीद है। कहना है कि धान की रोपाई के दौरान एक स्थान पर कम से कम दो या तीन पौधे लगाने चाहिए। धान की फसल से समय-समय पर पानी निकालने की व्यवस्था करने तथा यूरिया का कम प्रयोग करना चाहिए।
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अच्छी फसल के लिए रोपाई के 72 घंटे में करें छिड़काव
बागपत। जिला कृषि रक्षाधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि रोपाई के 72 घंटे में फसल में खरपतवार के नियंत्रण के लिए छिड़काव करना चाहिए। किसान खरपतवार नियंत्रण के लिए पाइराजो सलफ्यूरान ईथाइल 10 प्रतिशत 80 ग्राम मात्रा या विषपाईरीबैक सोडियम दस प्रतिशत की 100 ग्राम मात्रा 20 से 21 दिन बाद तथा यदि चौड़ी पत्ती की खरपतवार है तो 2-4डी सोडियम साल्ट 250 ग्राम मात्रा का 150 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए।
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झुलसा से सूखने लगती हैं धान की पत्तियां
बागपत। धान की फसल में जैन्थोमानस कैपेस्ट्रिस के कारण झुलसा रोग हो जाता है। फसल में झुलसा रोग लगने से पत्तियां सूखने लगती हैं तथा पत्तियों के किनारे अनियमित एवं टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। फसल की पत्तियां नीचे की ओर झुककर पीली या भूरी हो जाती है तथा पौधा सूख जाता है।

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खेत से पानी निकालने की व्यवस्था करें किसान
बागपत। फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसान समय-समय पर खड़ी फसल से पानी निकालने की व्यवस्था करें तथा यूरिया का प्रयोग कम करें। इसके अलावा छह ग्राम स्ट्रेप्टोसाईक्लीन व 200 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ से छिड़काव करना चाहिए।
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