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पितृपक्ष में श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं पितृदेव, पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध जरूरी

Sat, 10 Sep 2022 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 12:18 AM IST
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Pitras are pleased by performing Shradh in Pitru Paksha: Pandit Rajkumar
बागपत। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध में तर्पण का विशेष महत्व होता है और तर्पण में तिल जौ चावल दूध कुशा का प्रयोग किया जाता है। शास्त्रों में बताया है कि पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा मनुष्य को सुख वैभव का वरदान देती है। इस बार दस सितंबर से श्राद्ध शुरू हो रहे हैं। 25 सितंबर को अमावस्या को समाप्त होंगे।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि श्राद्ध में पूर्वजों के किए गए कार्यों का उपकार प्रकट करने का समय माना जाता है। हमारे पूर्वज जो अब हमारे बीच में नहीं हैं, उनके प्रति सम्मान का समय ही पितृपक्ष कहलाता है। श्राद्ध एक ऐसा कर्म है जिसमें परिवार के दिवंगत व्यक्तियों (मातृकुल और पितृकुल) इष्ट देवताओं, गुरुओं के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए किया जाता है। उनकी आत्मा की शांति के लिए भाद्रपद माह की पूर्णिमा से लेकर आश्विन माह की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक श्राद्ध किया जाता है।
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पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पूर्वज दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति देते हैं। श्राद्ध पक्ष में पंचबलि का भी विशेष महत्व होता है। श्राद्ध में गाय, कुत्तों, कौओं को भोजन कराने से पितृ खुश होते हैं। श्राद्ध पक्ष में क्षौरकर्म नहीं करना चाहिए बल्कि सात्विक वस्तुओं का सेवन करना चाहिए।
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