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लोगों को सरकारी अस्पताल के इलाज पर नहीं भरोसा

Mon, 04 Jul 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 04 Jul 2016 02:02 AM IST
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People don't rely on the treatment of hospital
ठाकुरद्वारा मोहल्ले में अस्पताल की सेवाओं की जानकारी देती शारदा वर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। लोगों को सरकारी इलाज पर भरोसा नहीं रह गया है। एक बड़ा तबके ने अब सरकारी अस्पतालों में जाना ही छोड़ दिया है। इसका कारण दर्द की समय पर और सही दवा नहीं मिलना ही है।
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सत्तासीन नेता कहते हैं कि कई सुविधाएं कराई है। जो हालात बिगड़े हैं वह भी जल्द ही ठीक होंगे, लेकिन विपक्षी कहते हैं सिर्फ बागपत के लिए वायदे ही किए हैं। रालोद और भाकियू कहती है कि हालात सुधारने के लिए प्रयास ही नहीं किए हैं। स्वास्थ्य विभाग का चलताऊ रवैया और सरकार की लापरवाही के चलते स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों का विश्वास टूट रहा है।
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 प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों , दवा समेत अन्य सुविधाअों की कमी के कारण अधिकांश लोगों का सरकारी अस्पतालों से विश्वास उठता जा रहा है। इसका लाभ प्राइवेट अस्पताल चला रहे चिकित्सकों को लाभ भी मिल रहा है। इससे गरीब मरीजों को  सबसे अधिक परेशान उठानी पड़ रही है। जबकि अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने का दावा करते धम नहीं है। इस संबध विभिन्न स्तर के लोगों से सरकारी अस्पतालों के बारे में जानने का प्रयास किया गया है।  
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रालोद के जिलाध्यक्ष सुखबीर गठीना कहते हैं कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा गरीब तबके के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गरीब आदमी बड़े डॉक्टर की महंगी फीस नहीं चुका सकता। सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिलता। इस कारण बीमारियां लाइलाज हो जाती हैं। लोग बेवक्त मरते हैं। प्राथमिकता के आधार पर लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल का इंतजाम किया जाना चाहिए। 

पूर्व चेयरमैन रोहताश गुप्ता ने कहा सरकारी अस्पतालों में घंटों तक डॉक्टर नहीं मिलते हैं। सही प्रकार से उपचार नहीं होता है। कभी दवा नहीं मिलती तो कभी डॉक्टर नहीं मिलते। सरकारी स्वास्थ्य सेवा सहीं नहीं है। इसलिए अधिकांश लोग प्राइवेट चिकित्सकों  से इलाज कराते हैं। जब सही दवा मिलेगी तो कोई क्यों प्राइवेट डॉक्टरों के यहां इलाज कराएगा।

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक और उपकरणों की कमी जिले के प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अदूरदर्शिता के कारण है। सही पैरवी नहीं की जा रही है। इस कारण जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी में चिकित्सकों की कमी है। उन्होंने कहा मूलभूत समस्याओं को दूर नहीं किया  तो स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को बंधक बनाया जाएगा।

व्यापारी नेता नंदलाल डोगरा ने बताया स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक मरीजों के साथ असभ्य व्यवहार करते हैं। सही प्रकार से उपचार नहीं करते हैं। ऐसी व्यवस्था को देखकर ही अधिकांश मरीज मजबूरी में प्राइवेट चिकित्सक से इलाज कराने के लिए जाते  हैं, यदि सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सुधरने तो लोग प्राथमिकता से सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराने जाएं। 

जिला पंचायत सदस्य और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और सपा नगराध्यक्ष भूरू कुरैशी का दावा है चिकित्सक और उपकरणों की कमी को प्रभारी मंत्री सुधीर रावत को अवगत कराया जा चुका है। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस बार कॉलेजों में सीटें बढ़ा दी है। अब स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की कमी नहीं रहेगी। सपा सरकार में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है। जो कमियां हैं, उन्हें पूरा कराया जाएगा। आमजन को सरकारी अस्पताल का लाभ मिल सके।

आईएमए अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन का कहना है कि डॉक्टर सरकारी हो या प्राइवेट अपनी तरफ से बेहतर इलाज देने का प्रयास करते हैं। यह लोगों की व्यक्तिगत सोच है कि वह प्राइवेट में इलाज कराना चाहते हैं या सरकारी में। खाली पदों पर नियुक्ति तो शासन के हाथ में है, उस पर स्थानीय स्तर से केवल प्रयास किए जा सकते हैं।

सीएमओ डॉ. रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही है। डीएम की तरफ से शासन को पत्र लिखा जा चुका है। सुविधाओं के लिए विभागीय अधिकारियों और शासन को पत्र भेज चुके हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच मशीन और दवाइयां उपलब्ध है।


19 वर्ष से नहीं गए सरकारी अस्पताल
शहर के ठाकुरद्वारा मोहल्ला निवासी शारदा वर्मा ने बताया 19 साल पहले सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से विश्वास उठ गया था जिस दिन बहू की डिलीवरी को घंटों अस्पताल में बैठाए रखा। बाद में प्राइवेट चिकित्सक के यहां रेफर कर दिया था। उन्होंने कहा सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक लापरवाह है और उपकरण भी सही नहीं है। तब से अब तक वे सरकारी अस्पताल में नहीं गए है। 
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