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जिला अस्पताल में बिजली न आने से बिलबिलाए मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 19 Jun 2017 01:22 AM IST
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जिला अस्पताल में बिजली नहीं आने पर पेड़ के नीचे बैठे गर्मी से बेहाल मरीज और तीमारदार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल में रविवार को करीब साढ़े तीन घंटे बिजली नहीं आने के कारण मरीज परेशान रहे। कुछ मरीजों को पेड़ के नीचे लेटना पड़ा। बिजली नहीं होने के कारण जिला अस्पताल में पेयजल की भी किल्लत रही। अस्पताल में लाइट नहीं होने के सवाल पर सीएमएस स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है। मरीजों को कितनी सुविधा मिलती है इसकी बानगी रविवार को जिला अस्पताल में देखने को मिली। अस्पताल में सुबह करीब साढ़े नौ बजे लाइट चली गई थी। इंतजार करने के बाद लाइट नहीं आई, कर्मचारियों से मरीजों ने जनरेटर चलाने के लिए बोला, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
तिमारदार अपने मरीजों को वार्ड से लेकर अस्पताल के बाहर आ गए। जमीन पर ही मरीजों को लेटा दिया। ढ़िकौली गांव का सोनू पेट में दर्द होने के कारण अस्पताल में भर्ती है। उसको ग्लूकोज की बोतल लगी है। गर्मी के कारण परिजन हाथ में बोतल पकड़कर उसको अस्पताल से बाहर लेकर आए।
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बागपत शहर निवासी सबिला की बेटी का बेटा डेढ़ वर्षीय चांद अस्पताल में भर्ती है। बिजली नहीं होने के कारण वार्ड में भयंकर गर्मी रही, इसलिए उसको लेकर बाहर आए है। इसी तरह छह माह के रिहान को लेकर परिजन पेड़ के नीचे आ गए। तिमारदारों ने भी पेड़ों के नीचे लेटकर समय व्यतीत किया। दोपहर करीब एक बजे लाइट आई, तब जाकर मरीज अस्पताल के वार्ड में पहुंचे।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है। मरीजों को कितनी सुविधा मिलती है इसकी बानगी रविवार को जिला अस्पताल में देखने को मिली। अस्पताल में सुबह करीब साढ़े नौ बजे लाइट चली गई थी। इंतजार करने के बाद लाइट नहीं आई, कर्मचारियों से मरीजों ने जनरेटर चलाने के लिए बोला, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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तिमारदार अपने मरीजों को वार्ड से लेकर अस्पताल के बाहर आ गए। जमीन पर ही मरीजों को लेटा दिया। ढ़िकौली गांव का सोनू पेट में दर्द होने के कारण अस्पताल में भर्ती है। उसको ग्लूकोज की बोतल लगी है। गर्मी के कारण परिजन हाथ में बोतल पकड़कर उसको अस्पताल से बाहर लेकर आए।
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बागपत शहर निवासी सबिला की बेटी का बेटा डेढ़ वर्षीय चांद अस्पताल में भर्ती है। बिजली नहीं होने के कारण वार्ड में भयंकर गर्मी रही, इसलिए उसको लेकर बाहर आए है। इसी तरह छह माह के रिहान को लेकर परिजन पेड़ के नीचे आ गए। तिमारदारों ने भी पेड़ों के नीचे लेटकर समय व्यतीत किया। दोपहर करीब एक बजे लाइट आई, तब जाकर मरीज अस्पताल के वार्ड में पहुंचे।