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अधिकारियों ने सीएए की भ्रांतियों को दूर किया

Fri, 27 Dec 2019 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 12:15 AM IST
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Officials clear CAA misconceptions
बड़ौत (बागपत)। कोतवाली में आयोजित मुस्लिम धर्म गुरुओं एवं मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बैठक में एडीएम अमित कुमार और एएसपी अनिल कुमार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की भ्रांतियों को दूर किया और उनसे पुलिस-प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
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एडीएम और एएसपी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम की जानकारी दी और बताया कि यह कानून सिर्फ नागरिकता देने के लिए हैं किसी की नागरिकता छीनने का अधिकार इसमें नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत के अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमानों का सीएए में कोई अहित नहीं है। यह कानून किसी भी भारतीय हिंदू मुसलमान आदि को प्रभावित नहीं करता है। इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन, बौद्ध धर्म को मानने वाले शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। जो 31 दिसंबर 2014 से पूर्व ही भारत में रह रहे हो और जो केवल इन देशों से धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए गए हो। उन्होंने बताया कि अभी तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था। यह कानून केवल उन लोगों के लिए है, जिन्होंने कई साल से बाहर उत्पीड़न का सामना किया और उनके पास भारत आने के अलावा कोई जगह नहीं है। इसमें एसडीएम दुर्गेश मिश्र, कोतवाली प्रभारी राकेश कुमार सिंह, दाऊद हसन, मुक्ती अयूब, कारी मतलूब, कारी अब्दुल वाजिद, मौलाना अली, शाहिद प्रधान, गुलजार अहमद, कारी राशिद, लियाकत, मौलाना अरशद, महमूद, मौलाना एहसान, वाजिद खान, तौहसीम खान, शराफत आदि रहे।
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