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मंदिरों के कपाट बंद, नहीं किए गए शुभ कार्य
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 08 Aug 2017 01:26 AM IST
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ठाकुरद्वारा मंदिर के बंद हुए कपाट।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चंद्रग्रहण किसी के लिए फलदायी होगा और किसी के दुखदायी। सूतक नौ घंटे पहले ही शुरू हो गया है। सोमवार रात 10:40 बजे ग्रहण शुरू हो जाएगा। मंदिरों के कपाट बंद हो गए।
सोमवार की रात में 10:40 बजे से चंद्रग्रहण शुरू हुआ। इसकी अवधि एक घंटा 55 मिनट रही।
ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। सभी मंदिरों के कपाट इसके चलते बंद करा दिए। शुभ कार्य करने पर भी ग्रहण का समय सही नहीं माना जाता। ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया सूतक काल में ही शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। ग्रहण के शुरू आते ही भगवान की भक्ति में लीन होने से इसका असर कम हो जाता है और फलदायी रहता हैं।
बच्चे, रोगी और वृद्ध को छोड़कर खाने-पीने पर प्रतिबंध कर देना चाहिए। जब तक भी ग्रहण काल रहेगा, कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इसके लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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ग्रहण के स्पर्श होते ही ईश्वर की उपासना करनी चाहिए। किसी भी तरह का फल और सब्जी को न काटे। खाना नहीं बनाया चाहिए। ग्रहण के समाप्त होने के बाद स्नान कर भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। नमक और गेहूं का दान करना शुभ होता है।
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सोमवार की रात में 10:40 बजे से चंद्रग्रहण शुरू हुआ। इसकी अवधि एक घंटा 55 मिनट रही।
ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। सभी मंदिरों के कपाट इसके चलते बंद करा दिए। शुभ कार्य करने पर भी ग्रहण का समय सही नहीं माना जाता। ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया सूतक काल में ही शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। ग्रहण के शुरू आते ही भगवान की भक्ति में लीन होने से इसका असर कम हो जाता है और फलदायी रहता हैं।
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बच्चे, रोगी और वृद्ध को छोड़कर खाने-पीने पर प्रतिबंध कर देना चाहिए। जब तक भी ग्रहण काल रहेगा, कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इसके लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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ग्रहण के स्पर्श होते ही ईश्वर की उपासना करनी चाहिए। किसी भी तरह का फल और सब्जी को न काटे। खाना नहीं बनाया चाहिए। ग्रहण के समाप्त होने के बाद स्नान कर भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। नमक और गेहूं का दान करना शुभ होता है।