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नहीं कोई प्रतिबंध, खूब बिक रहा चाइनीज मांझा
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खानापूर्ति के लिए अभियान चलाती है पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाला चाइनीज मांझा लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा चाइनीज मांझे की बिक्री जारी है। यह स्थिति तब है कि जब इसकी चपेट में आकर कई लोग घायल हो चुके है। शहर भर में खुली पतंगों की दुकानों पर बेरोकटोक चाइनीज मांझा खरीदा जा सकता है। पुलिस का अभियान भी सिर्फ खानापूर्ति वाला ही रहता है।
क्या कहते है लोग
विनीत मलिक, सोनू तोमर, बिटटू गर्ग, आदिश जैन आदि लोगों का कहना है कि चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए। कहना है कि चाइनीज मांझा लोगों के लिए खतरनाक हैं। इसे बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
चाइनीज मांझे से ये हो चुके है घायल
बड़ौत के पठानकोट निवासी मोहम्मद अरशद अली पुत्र राशिद अपनी पत्नी रिहाना के साथ कुछ दिन पूर्व बाइक से शामली जा रहा था। बावली गांव के पास चाइनीज मांझा उसकी गर्दन व हाथ में लिपटा गया। हाथ व गर्दन पर तेज कट लगने से वह लहूलुहान हो गया था। रक्षाबंधन पर्व के कुछ दिन पहले भी बावली गांव में एक स्कूल के शिक्षक व कर्मचारी की बाइक पर जाते समय चाइनीज मांझे से ही गर्दन कट गई थी। कर्मचारी को 11 टांके गर्दन पर आए थे।
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इन कारणों से चाइनीज मांझे की डिमांड
देशी मार्का मांझे की छह रील (3600 मीटर) की चरखी की कीमत बाजार में 500 से 800 रुपये तक है। चाइनीज मांझे की चरखी 300 से 400 में उपलब्ध है। देशी की तुलना में चाइनीज मांझा न ज्यादा टूटता है और न ही बारिश में खराब होता है। इस कारण इसकी खूब बिक्री होती है।
पुलिस विभाग के साथ मिलकर कई बार प्रशासन ने चाइनीज मांझे के खिलाफ अभियान चलाया है। आगे भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे। - दुर्गेश मिश्र, एसडीएम।
इन त्यौहारों पर खूब बिकता है चाइनीज मांझा
रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, 15 अगस्त व मकर संक्रांति पर्व पर बच्चे और युवा पतंग उड़ाते हैं। नगर के बड़ा जैन मंदिर, गली तिहाइयान पर दर्जनों पतंग की दुकानें है। यहां चोरी छिपे मांझे की बिक्री हो रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाला चाइनीज मांझा लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा चाइनीज मांझे की बिक्री जारी है। यह स्थिति तब है कि जब इसकी चपेट में आकर कई लोग घायल हो चुके है। शहर भर में खुली पतंगों की दुकानों पर बेरोकटोक चाइनीज मांझा खरीदा जा सकता है। पुलिस का अभियान भी सिर्फ खानापूर्ति वाला ही रहता है।
क्या कहते है लोग
विनीत मलिक, सोनू तोमर, बिटटू गर्ग, आदिश जैन आदि लोगों का कहना है कि चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए। कहना है कि चाइनीज मांझा लोगों के लिए खतरनाक हैं। इसे बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
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चाइनीज मांझे से ये हो चुके है घायल
बड़ौत के पठानकोट निवासी मोहम्मद अरशद अली पुत्र राशिद अपनी पत्नी रिहाना के साथ कुछ दिन पूर्व बाइक से शामली जा रहा था। बावली गांव के पास चाइनीज मांझा उसकी गर्दन व हाथ में लिपटा गया। हाथ व गर्दन पर तेज कट लगने से वह लहूलुहान हो गया था। रक्षाबंधन पर्व के कुछ दिन पहले भी बावली गांव में एक स्कूल के शिक्षक व कर्मचारी की बाइक पर जाते समय चाइनीज मांझे से ही गर्दन कट गई थी। कर्मचारी को 11 टांके गर्दन पर आए थे।
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इन कारणों से चाइनीज मांझे की डिमांड
देशी मार्का मांझे की छह रील (3600 मीटर) की चरखी की कीमत बाजार में 500 से 800 रुपये तक है। चाइनीज मांझे की चरखी 300 से 400 में उपलब्ध है। देशी की तुलना में चाइनीज मांझा न ज्यादा टूटता है और न ही बारिश में खराब होता है। इस कारण इसकी खूब बिक्री होती है।
पुलिस विभाग के साथ मिलकर कई बार प्रशासन ने चाइनीज मांझे के खिलाफ अभियान चलाया है। आगे भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे। - दुर्गेश मिश्र, एसडीएम।
इन त्यौहारों पर खूब बिकता है चाइनीज मांझा
रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, 15 अगस्त व मकर संक्रांति पर्व पर बच्चे और युवा पतंग उड़ाते हैं। नगर के बड़ा जैन मंदिर, गली तिहाइयान पर दर्जनों पतंग की दुकानें है। यहां चोरी छिपे मांझे की बिक्री हो रही है।