एनजीटी का आदेश, तीन दिन में ग्रामीणों को मिले स्वच्छ पानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दोआब पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह ने बताया कि बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, गाजियाबाद और मेरठ जनपदों के हिंडन और कृष्णा नदियों के किनारे बसें गांवों के प्रदूषित पानी और इससे फैलने वाली बीमारियों को लेकर 11 नवंबर 2014 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में मामला दाखिल किया गया था। इसी साल 17 मई को एनजीटी ने प्रदूषित जल से बीमार होने वाले लोगों की सूची मांगी थी, जिसे कोर्ट में दाखिल किया गया था।
मंगलवार को एनजीटी चेयरमैन स्वतंत्र कुमार के सामने बागपत के विभिन्न गांवों के पीड़ित पेश हुए। चेयरमैन ने सुनवाई के बाद मुख्य सचिव को आदेश दिया कि तीन दिन के अंदर गांव के लोगों को स्वच्छ पीने का पानी मुहैय्या कराया जाए। इसके लिए एक कमेटी मुख्य सचिव की देखरेख में बनाएं। जिसके अंतर्गत उप्र सरकार प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन, मेंबर, सेकेट्री और उप्र जल निगम के एमडी/सीईओ होंगे। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय के अंतर्गत देगी।
रिपोर्ट बनाने में देरी की गई अथवा इसमें कोई गड़बड़ी पाई गई तो कमेटी के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार उन सभी गांवों में जहां-जहां पीने के पानी की संकर्मणता है, टैंकरों द्वारा पानी भिजवाने की व्यवस्था करें। इससे पहले भी पांच अगस्त 2015 और पांच नवंबर 2015 को एनजीटी इस विषय में आदेश कर चुकी है। लेकिन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है।
बागपत के यह लोग हुए पेश
मंगलवार को एनजीटी में क्षेत्र के पट्टी बंजारान, झूंडपुर, गांगनौली आदि गांवों से विकलांग पहुंचे और जस्टिस के समक्ष पेश हुए। इनमें सोनिया शर्मा, मोनिया, कादिर, सोनिया, साहिल, अजरूद्दीन, अमन, वाशिद, सलमान खान और लक्की शामिल है।
आदेश का नहीं होता पालन
दोआब पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह ने बताया कि अब तक एनजीटी के फैसलों के बावजूद एक बूंद पानी की किसी गांव में नहीं सप्लाई हुई और न ही एनजीटी के किसी आदेश का पालन हुआ। लोग महामारी के शिकार के कगार पर है। पानी की रिपोर्ट कोर्ट में जल निगम और प्रदूषण विभाग द्वारा दाखिल की जाती है जो कि अधूरी है। उसमें भारी तत्व टेस्ट नहीं किए जाते जो कि बीमारी का मुख्य कारण है।
डीएम ने दाखिल किया शपथपत्र
मंगलवार को एनजीटी में डीएम मुजफ्फरनगर की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया। उसमें भी लैब की रिपोर्ट में भारी तत्वों को टेस्ट नहीं किया गया। जवाब दाखिल किया गया कि बजट की कमी है। इसके टेस्ट में 164.479 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह सुविधा यूपी जल निगम के पास नहीं है। प्रशासन ने स्वीकार किया है कि पानी जहरीला है और इसके अंदर टॉक्सिक भारी तत्व मौजूद है।