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Baghpat News: वैदिक संस्कृति से ही राष्ट्रीय भावना जागृत होती है
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फोटो संख्या 2
बड़ौत। रेलवे रोड स्थित आर्य समाज भवन और बावली चौक स्थित आर्य समाज पट्टी चौधरान कार्यालय में रविवार को आयोजित सप्ताहिक यज्ञों में आर्यजनों ने यज्ञ की आहुतियां देकर धर्मलाभ उठाया।
इस अवसर पर समरभानु आचार्य ने कहा कि वैदिक काल से हमारे देश का नाम आर्यवर्त, भारतवर्ष के नाम से जाना जाता रहा है। इसमें आर्य निवास करते थे। आर्य शब्द के बारे में महर्षि दयानंद सरस्वती लिखते हैं कि आर्य -श्रेष्ठ स्वभाव, धर्मात्मा, परोपकारी सत्यविद्यादि गुण युक्त आर्यवर्त देश में सब दिन से रहने वाले, आर्य कहलाते हैं। वर्तमान में हम अपनी वैदिक संस्कृति और परंपराओं का परित्याग कर विदेशी संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं। यदि यही क्रम चलता रहा तो हमारी संस्कृति नष्ट हो जाएगी। आर्य समाज बड़ौत द्वारा आयोजित यज्ञ के ब्राह्म समरभानु आचार्य और यजमान राजेन्द सिंह रहे। उधर, आर्य समाज पट्टी चौधरान द्वारा आयोजित यज्ञ के ब्रह्मा ओमपाल शास्त्री और यजमान राममेहर सिंह रहे। इस अवसर पर डॉ़ ओमवीर सिंह, प्रीतम सिंह आर्य, डॉ़ हरपाल सिंह, हरवीर सिंह, जसवीर मलिक, तेजेंद्र सिंह, पंकज आर्य मौजूद रहे।
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बड़ौत। रेलवे रोड स्थित आर्य समाज भवन और बावली चौक स्थित आर्य समाज पट्टी चौधरान कार्यालय में रविवार को आयोजित सप्ताहिक यज्ञों में आर्यजनों ने यज्ञ की आहुतियां देकर धर्मलाभ उठाया।
इस अवसर पर समरभानु आचार्य ने कहा कि वैदिक काल से हमारे देश का नाम आर्यवर्त, भारतवर्ष के नाम से जाना जाता रहा है। इसमें आर्य निवास करते थे। आर्य शब्द के बारे में महर्षि दयानंद सरस्वती लिखते हैं कि आर्य -श्रेष्ठ स्वभाव, धर्मात्मा, परोपकारी सत्यविद्यादि गुण युक्त आर्यवर्त देश में सब दिन से रहने वाले, आर्य कहलाते हैं। वर्तमान में हम अपनी वैदिक संस्कृति और परंपराओं का परित्याग कर विदेशी संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं। यदि यही क्रम चलता रहा तो हमारी संस्कृति नष्ट हो जाएगी। आर्य समाज बड़ौत द्वारा आयोजित यज्ञ के ब्राह्म समरभानु आचार्य और यजमान राजेन्द सिंह रहे। उधर, आर्य समाज पट्टी चौधरान द्वारा आयोजित यज्ञ के ब्रह्मा ओमपाल शास्त्री और यजमान राममेहर सिंह रहे। इस अवसर पर डॉ़ ओमवीर सिंह, प्रीतम सिंह आर्य, डॉ़ हरपाल सिंह, हरवीर सिंह, जसवीर मलिक, तेजेंद्र सिंह, पंकज आर्य मौजूद रहे।
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