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Baghpat News: राजा परीक्षित के जन्म की कथा का वर्णन किया
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-कस्बे के शिव मंदिर में विधि-विधान से हुआ कथा का शुभारंभ
फोटो- एक
संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। कस्बे के भरवानिया पट्टी स्थित शिव मंदिर में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा कराई गई। कथा वाचक पंडित रासबिहारी महाराज ने श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई।
कथा वाचक ने कहा कि उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित जब बड़े हुए तो नाती-पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख-वैभव से समृद्ध राज्य था। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए, जिससे उनको श्राप झेलना पड़ा। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पांडवों ने धर्म की रक्षा के लिए कौरवों से युद्ध किया था और इस युद्ध में भीष्म पितामह को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इस दौरान दुर्गेश ठाकुर, रामपाल, मास्टर दीपचंद, सचिन, गौरव, सुभाष सभासद, शैलेश, महेंद्र, अंगूरी शारदा, पूर्व चेयरमैन डॉ़ विनोद कुमार मौजूद रहे।
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फोटो- एक
संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। कस्बे के भरवानिया पट्टी स्थित शिव मंदिर में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा कराई गई। कथा वाचक पंडित रासबिहारी महाराज ने श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई।
कथा वाचक ने कहा कि उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित जब बड़े हुए तो नाती-पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख-वैभव से समृद्ध राज्य था। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए, जिससे उनको श्राप झेलना पड़ा। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पांडवों ने धर्म की रक्षा के लिए कौरवों से युद्ध किया था और इस युद्ध में भीष्म पितामह को मोक्ष प्राप्त हुआ था। इस दौरान दुर्गेश ठाकुर, रामपाल, मास्टर दीपचंद, सचिन, गौरव, सुभाष सभासद, शैलेश, महेंद्र, अंगूरी शारदा, पूर्व चेयरमैन डॉ़ विनोद कुमार मौजूद रहे।
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