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नारद मोह लीला ने मन मोहा, ताड़का वध ने रोमांचित किया

Sat, 28 Sep 2019 12:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 12:51 AM IST
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Narada Moh Leela thrills Man Moha, Tadka Slaughter
ख्ेकड़ा नगर मे पांडव चौक पर रामलीला का मंचन करते श्री बालाजी रामलील के कलाकार - फोटो : KAHKRA
नारद मोह लीला ने मन मोहा, ताड़का वध ने रोमांचित किया
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खेकड़ा (बागपत)। शहर में श्री धार्मिक रामलीला कमेटी की ओर से गांधी प्याऊ पर चल रही रामलीला में नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। वहीं, श्री बालाजी रामलीला में श्रीराम जन्म से लेकर ताड़का वध तक का मंचन किया गया। नारद मोह लीला ने दर्शकाें का मन मोह लिया तो ताड़का वध के दृश्यों ने रोमांचित किया।
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के मंचन के दौरान डायरेक्टर उमेश शर्मा, मुकेश शर्मा, कमेटी के प्रधान अरविंद शर्मा बोबी, महामंत्री पुष्पेन्द्र कुमार, कोषाध्यक्ष पीयूष कुमार, उमाशंकर शर्मा, दीपक शर्मा, पुनीत शर्मा, मुकेश गुप्ता, श्रद्धानंद पांचाल, धीरू शर्मा, राजू पांचाल, मुकेश गुप्ता, अनिरुद्ध, नवीन शर्मा, नरेश शर्मा, नवाब धामा, राजा शर्मा, धीरु भैया, सुरेन्द्र शर्मा, सौरव जैन, तरुण गुप्ता, अरुण धामा, विपिन गुप्ता, नेतराम रूहेला, राजू पांचाल आदि मौजूद रहे।
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उधर, श्री बालाजी रामलीला में अयोध्या के राजा दशरथ की पुत्र रत्न प्राप्ति न होने के कारण बहुत चिंतित थे। गुरु वशिष्ठ उन्हें श्रृंगी ऋषि से उपाय करने के लिए उन्हें बुलाते हैं। श्रृंगी ऋषि महाराज दशरथ को यज्ञ करने की सलाह देते हैं। महाराज दशरथ गुरु वशिष्ठ और श्रृंगी ऋषि तीनों मिलकर यज्ञ को सफल बनाते हैं। यज्ञ सफल होने से महाराजा दशरथ को अपनी तीनों रानियों से चार पुत्र रत्न राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की प्राप्ति होती है। महाराजा जनक के दरबार में कुछ प्रजा वासी अपनी समस्या लेकर आते हैं। और कहते हैं कि पूरे राज्य में सूखा और अकाल पड़ा हुआ है। सब लोग परेशान हैं। प्रजावासी दुखी हैं। इसके बाद ऋषि सदानंद राजा जनक को खेत में हल चलाने की सलाह देते हैं। राजा जनक खेत में हल चलाते हैं तो उनका हल रुक जाता है। और वहां घड़े में एक सुंदर कन्या उन्हे मिलती है। कन्या को वह अपनी पुत्री मानकर उसका नाम सीता रख देते हैं।
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वहीं, ताड़का सुबाहू मारीच का आतंक दिन पर दिन बढ़ता जा रहा था। सब ऋषि मुनि उनसे परेशान थे। उनके आश्रमों पर हड्डियां फेंकते उनके हवन में विघ्न डालते और उत्पात मचाते रहते थे। महर्षि विश्वामित्र उनसे परेशान होकर राजा दशरथ के पास जाते हैं। और राक्षसो से मुक्ति पाने के लिए राम लक्ष्मण को उनके साथ भेजने की अनुमति लेते हैं। महाराजा दशरथ विश्वामित्र जी को अपने दोनों पुत्रों राम लक्ष्मण को उनके साथ भेज देते हैं। जहां राम सुबाहु और ताड़का का वध कर देते है। इस दौरान प्रधान नितिन जैन, डायरेक्टर राजेश शर्मा, अजय शर्मा, नरेंद्र शर्मा, अजेश जैन, आकाश जैन, चुनमुन जैन, मनोज जैन, डा मनोज धामा, रविंद्र धामा, राजेंद्र यादव, आनंद यादव, सुनील रूहैला, अमित कुमार, धर्मबीर यादव, संजीव जैन, प्रवीन यादव, माधव शर्मा, सन्नी गुप्ता, सचिन, मोहन बेदी आदि मौजूद रहे।
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