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चुनरी में सौहार्द के सितारे जड़ रहीं मुस्लिम महिलाएं

Fri, 30 Sep 2022 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 12:24 AM IST
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Muslim women are rooting the stars of harmony in Chunari
बड़ौत। नवरात्र पर मां के शृंगार के लिए मुस्लिम महिलाएं भी पूरी तन्मयता से योगदान दे रही हैं। मां की चुनरिया को आकर्षक बनाने के लिए उसमें गोटे और सितारे जड़ने की जिम्मेदारी मुस्लिम महिलाओं ने उठाई है। यह उनके लिए न सिर्फ एक रोजगार है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए आपसी सौहार्द का संदेश भी है।
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पठान कोट मोहल्ले में करीबन 900 मुस्लिम परिवार रहते हैं। खास यह है कि इनमें से करीब 400 परिवार ऐसे हैं, जो नवरात्र शुरू होने से करीब एक माह पहले नवरात्रों में नौ दिन अलग-अलग स्वरूपों में पूजे जाने वाली माता की चुनरी बनाने में जुट जाते हैं। घर की महिलाएं, युवतियां, बच्चे, बूढे़ और जवान सुबह से शाम तक चुनरी तैयार करते रहते हैं।
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इनके हाथों से बनी चुनरी की मांग उत्तर प्रदेश के अलावा सोनीपत, दिल्ली, लोनी, उत्तराखंड आदि अन्य राज्यों में है। यहां बनने वाली चुनरी बागपत के अलावा दिल्ली, सोनीपत, लोनी, गाजियाबाद हरिद्वार में चंडी देवी, मंसा देवी के दरबार तक जाती है।
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मां तो मां होती है, धर्म से क्या लेना
बड़ौत। मल्लिका और उसका परिवार पिछले डेढ़ दशक से मां की चुनरी तैयार कर रहा है। उनका घर तो चलता ही है, साथ ही इस तरह के कार्य से कौमी एकता कायम होती है। इसके अलावा गुलफसा और फरीन का कहना है कि मां तो मां होती है, मां का धर्म से क्या लेना। इसलिए कभी ऐसा नहीं लगा कि मुस्लिम होकर मां दुर्गा की चुनरी क्यों तैयार करते हैं। दिलशाना और कोशर का कहना है कि आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए यह मिसाल उन लोगों के लिए अच्छा उदाहरण है, जो दोनों वर्गों में जहर खोलकर झगड़ा कराने की कोशिश करते हैं।
पूरे दिन में तैयार होती है 15 से 20 चुनरी
पठान कोट निवासी रुखसाना, रूबी, सोनिया ने बताया कि माता की चुनरी बनाने से ही परिवार का खर्च नहीं चल पाता। बल्कि माता की चुनरी में गोटा लगाकर सजावट करने में रुचि है। एक चुनरी तैयार करने पर मात्र आठ से दस रुपये मिलते हैं। चुनरी बनाने में करीब एक घंटा लगता है। यानी परिवार का एक सदस्य पूरे दिन में दस या 15 से 20 चुनरी तैयार कर पाता है।

यहां होती है सप्लाई
पठान कोट मोहल्ले के गुलफाम, डॉ. गफ्फार, कय्यूम, मेहरबान, जावेद, मुस्कान, शबाना ने कहा चुनरी तैयार होते ही जगह-जगह के ठेकेदार चुनरी खरीदने के लिए आ जाते हैं, जो बाद में दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, हरिद्वार आदि जगहों पर सप्लाई करते हैं। मार्केट में इन्हीं चुनरियों को लोग 100 से 150 रुपये में खरीदते हैं। उन्होंने तो मात्र एक चुनरी पर केवल 20 रुपये का फायदा होता है।
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