Baghpat News: नौका पर सवार होकर आ रहीं मातारानी, सुख-समृद्धि का देंगी वरदान
चैत्र नवरात्र 22 मार्च से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र का शुभारंभ उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में शुक्ल योग में हो रहा है।
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चैत्र नवरात्र 22 मार्च से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र का शुभारंभ उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में शुक्ल योग में हो रहा है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र को ज्ञान, सौभाग्य, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस बार नक्षत्र और योग का संयोग अति शुभ है। नवरात्र में माता को गुड़हल का पुष्प अर्पित करने और लौंग व कपूर की आहुति देने से सुख-सम़द्धि की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के नौ दिन आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के कारक माने जाते हैं। 22 मार्च को माता रानी नौका पर सवार होकर आ रहीं हैं। माता सुख-समृद्धि का वरदान देंगी। उन्होंने बताया कि कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त सुबह 6:04 बजे से साढ़े सात बजे तक है। इसके अलावा सुबह नौ बजे से दस बजे तक भी कलश की स्थापना की जा सकती है।
इस बार नवरात्र में कई महायोगों का निर्माण हो रहा है। आदित्य योग एवं शुक्ल योग, दो सर्वार्थ सिद्धि योग, तीन रवि योग के अलावा अमृत सिद्धि योग व द्विपुष्कर योग बन रहा है। नवरात्र में माता का विधि-विधान से पूजन करने से माता मनोकामना पूर्ण करेंगी। नवरात्र में तामसी वस्त्रों का प्रयोग न करें। माता के लिए देसी घी और भैरव की तेल की त्योति जलाएं। उन्होंने बताया कि भैरव की पूजा के बिना माता की पूजा पूरी नहीं होती है। नवरात्र में माता की ज्योति ईशान कोण में और भैरव की ज्योति अग्नि कोण में जलानी चाहिए।
ईशान कोण में करें कलश की स्थापना
तांबे या मिट्टी के कलश में गंगाजल, अक्षत, लौंग, इलायची, सुपारी, दूर्वा, एक सिक्का रखें। आम के पत्ते कलश में डालकर उसके ऊपर नारियल को बैठा दें। नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें और वरुण देव का पूजन करें। कलश की स्थापना ईशान कोण में ही करनी चाहिए।
ऐसे करें चौकी की स्थापना
चौकी पर मां दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर माता का ध्यान करें। दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, पंचामृत से माता को स्नान कराने के बाद तिलक लगाकर पुष्प अर्पित करे और पंचमेवा का भोग लगाना चाहिए। श्री दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।