जमीन की जंग: पीढ़ियां बदलीं, कई जानें गईं, फिर भी नहीं मिली कृषि भूमि, 43 वर्ष चली चकबंदी से टूट गए किसान
बागपत में मंगलवार को जमीन पर कब्जा दिलाने गई चकबंदी व तहसील की टीम के सामने एक किसान व उसकी पुत्रवधू ने जहरीला पदार्थ निगल लिया। यह पहला मामला नहीं है, जब किसान चकबंदी प्रक्रिया के आगे मजबूर होकर अपनी जान लेने का प्रयास कर रहे हों। पढ़ें ये ग्राउंड रिपोर्ट।
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विस्तार
लगभग 43 वर्ष से चकबंदी प्रक्रिया क्षेत्र के कई गांवों के सैकड़ों किसानों के लिए नासूर बन चुकी है। कई पीढि़यां बदल चुकी हैं और कई किसानों की जान भी जा चुकी है। बहुत से आत्महत्या का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन हवाई चक काटने के बाद आज तक कब्जा परिर्वतन तक नहीं हुआ। इतना ही नहीं सैकड़ों किसानों की जमीन ही गुम हो चुकी है।
वर्ष 1981 से रंछाड़, बामनौली, बरनावा समेत अन्य कई गांवों में चकबंदी का कार्य चल रहा है, लेकिन पैमाइश में गड़बड़ी को लेकर इन गांवों के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक चकबंदी न कराने के पक्ष में है और दूसरा पक्ष चकबंदी कराने की मांग कर रहा है।
इस दौरान जमीन की पैमाईश से लेकर जमीन पर कब्जा दिलाने को लेकर अधिकारियों के पास तमाम शिकायतें गई हैं लेकिन 43 साल बीत जाने के बाद भी समस्या का कोई ठोस निस्तारण नहीं किया गया है।
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43 साल चली चकबंदी से टूट गए किसान
बामनौली गांव में 1981 से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की। किसानों के गलत तरीके से चक बनाए गए, जिसे लेकर किसान कोर्ट चले गए। इसके बाद फिर 1989 में चक काटे गए, वह भी गलत तरीके से काटे गए थे। उसके बाद 1991 में चक काटे गए और धारा 20 लगा दी गई। उस समय न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस की टीम ने इसकी जांच की तो खामियां पाई गई। फिर से चक बनाने के लिए कहा गया था।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज न्यायालय में पेश कर चकबंदी कराने के आदेश जारी करा लिए और कोर्ट के आदेश पर चकबंदी कराई गई। कुछ साल पहले चकबंदी से आहत होकर किसान राम कुमार, किसान सहेंद्र टावर पर चढ़ गए थे, वहीं कई किसानों ने कृष्णा नदी में जल समाधि लेने की कोशिश की थी।
18 हजार बीघा जमीन, 2000 किसान
बामनौली की करीब 18 हजार बीघा जमीन पर चकबंदी होनी थी। इसमें 2000 किसान प्रभावित हुए। लेकिन हवाई चक काटने पर अधूरे कब्जा परिवर्तन के कारण किसान पीड़ित हैं। बार-बार आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन किसानों की समस्या अनसुनी की जा रही है।
अदालत में चकबंदी के 421 मुकदमे
चकबंदी अधिकारी, बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी और उप संचालक चकबंदी की अदालत में 421 मुकदमे लंबित पड़े हैं। सीओ चकबंदी बड़ौत के यहां भी 200 से अधिक मुकदमे हैं जबकि चकबंदी अधिकारी बागपत के यहां 150 मुकदमे लंबित हैं।
रंगे हाथ पकड़ा गया था लेखपाल
बामनौली गांव में कई साल पहले लेखपाल को विजिलेंस की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया था। इसके अलावा शासन स्तर से कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन सिस्टम सुधरता नहीं दिख रहा है।
केस नंबर एक
17 दिसंबर 2017 को चकबंदी में आठ बीघा जमीन के गलत बंटवारे से आहत होकर गांव के किसान कृष्णपाल (45) पुत्र अजब सिंह ने आत्महत्या की थी। इससे पूरा परिवार टूट गया था।
केस नंबर दो
12 दिसंबर बामनौली गांव में किसान अनुज ने जमीन की पैमाइश व कब्जा नहीं दिलाने से क्षुब्ध होकर तहसील में चकबंदी सीओ के कार्यालय के बाहर जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उसे सीएचसी पर भर्ती कराया गया था।
केस नंबर तीन
17 जनवरी 2013 को रंछाड़ गांव में चकबंदी विवाद को लेकर किसान प्रवीण पुत्र महेंद्र ने खुद गोली मारकर हत्या कर ली थी। इस हत्या के बाद प्रवीण के परिजनों ने दूसरे पक्ष के मकान पर पथराव व घर में घुसकर लाठी-डंडोें से हमला बोल दिया।