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मलकपुर गांव के पहलवानों की दुनिया भर में धूम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 May 2017 12:27 AM IST
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बड़ौत के मलकपुर गांव के अखाड़े में जोर अजमाते पहलवान
- फोटो : अमर उजाला
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बड़ौत (बागपत)। क्षेत्र के गांव मलकपुर के पहलवान बिना किसी सुविधा के दुनिया भर में धूम मचा रहे हैं। गांव के कबड्डी खिलाड़ी भी विश्व चैंपियनशिप तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। गांव में तीन अर्जुन अवार्डी समेत सैकड़ों पहलवान मौजूद हैं।
गांव में खलीफा दरियाव सिंह पहलवान के शिष्य इकबाल (70) और हरपाल (66) वर्ष 1978 से गांव में ही दो अखाड़े चला रहे हैं। इनमें गांव के ही नहीं शामली, खेकड़ा, लोनी, शाहदरा, छपरौली, किरथल, बड़ौत आदि स्थानों के बालक कुश्ती के दाव पेंच सीख रहे हैं। वर्तमान समय में गांव के दोनों अखाड़ों में दो हजार से अधिक युवक अभ्यास कर रहे हैं। सुबह के समय अखाड़े में गांव के बच्चे ही अभ्यास करते हैं, लेकिन शाम के समय दूरदराज के पहलवान रोजाना अभ्यास करने आते हैं। लगभग हर घर के बच्चे अखाड़े में अभ्यास करते देखे जा सकते हैं। इन अखाड़ों के कारण गांव के बच्चों में परवान चढ़ा पहलवानी का शौक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर जाकर ही रुका। बिना सुविधा यहां के पहलवानों और कबड्डी खिलाड़ियों ने विदेशों तक धूम मचाई है।
एशिया चैंपियन और अर्जुन अवार्डी सुभाष, अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र और राजीव तोमर ने कुश्ती में धूम मचाई तो गांव के नितिन तोमर ने विश्व कबड्डी चैंपियनशिप में जलवा बिखेरा। सुविधा के बारे में अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र का कहना है कि फरवरी तक गांव में 45 लाख रुपये की लागत से खेल मैदान तैयार हो जाएगा। एशिया चैंपियन पहलवान सुभाष का कहना है गांव में सुविधा मिले तो यहां प्रतिभा की कमी नहीं है। कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर का कहना है कि प्रदेश सरकार से खिलाड़ियों को मदद नहीं मिल रही है। खेल का मैदान तैयार होने के बाद जरूर लाभ मिलेगा।
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गांव में खलीफा दरियाव सिंह पहलवान के शिष्य इकबाल (70) और हरपाल (66) वर्ष 1978 से गांव में ही दो अखाड़े चला रहे हैं। इनमें गांव के ही नहीं शामली, खेकड़ा, लोनी, शाहदरा, छपरौली, किरथल, बड़ौत आदि स्थानों के बालक कुश्ती के दाव पेंच सीख रहे हैं। वर्तमान समय में गांव के दोनों अखाड़ों में दो हजार से अधिक युवक अभ्यास कर रहे हैं। सुबह के समय अखाड़े में गांव के बच्चे ही अभ्यास करते हैं, लेकिन शाम के समय दूरदराज के पहलवान रोजाना अभ्यास करने आते हैं। लगभग हर घर के बच्चे अखाड़े में अभ्यास करते देखे जा सकते हैं। इन अखाड़ों के कारण गांव के बच्चों में परवान चढ़ा पहलवानी का शौक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर जाकर ही रुका। बिना सुविधा यहां के पहलवानों और कबड्डी खिलाड़ियों ने विदेशों तक धूम मचाई है।
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एशिया चैंपियन और अर्जुन अवार्डी सुभाष, अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र और राजीव तोमर ने कुश्ती में धूम मचाई तो गांव के नितिन तोमर ने विश्व कबड्डी चैंपियनशिप में जलवा बिखेरा। सुविधा के बारे में अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र का कहना है कि फरवरी तक गांव में 45 लाख रुपये की लागत से खेल मैदान तैयार हो जाएगा। एशिया चैंपियन पहलवान सुभाष का कहना है गांव में सुविधा मिले तो यहां प्रतिभा की कमी नहीं है। कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर का कहना है कि प्रदेश सरकार से खिलाड़ियों को मदद नहीं मिल रही है। खेल का मैदान तैयार होने के बाद जरूर लाभ मिलेगा।
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