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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Mahabharata memories buried in Barnava mounds

बरनावा टीले में दफन हैं महाभारत की यादें

Sun, 26 Jun 2016 01:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत Updated Sun, 26 Jun 2016 01:28 AM IST
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महाभारत कालीन संस्कृति सभ्यता की यादें आज भी बरनावा टीले में दफन हैं। प्राचीनकाल में महाभारत का अहम हिस्सा रहे वार्णावृत गांव वर्तमान में बरनावा के प्राचीन टीले का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया तो वहां ऊपरी सतह से ही महाभारत कालीन संस्कृति के चित्रित धूसर मृद भांड प्राप्त हुए। 
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शहजाद राय शोध संस्थान द्वारा किए जनपद बागपत के ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्थलों, स्मारकों के सूचीकरण और सर्वेक्षण के दौरान महाभारत सभ्यता पर विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें बरनावा टीले का विशेष प्रारंभिक सर्वेक्षण भी शामिल है।
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 बरनावा टीले की ऊपरी सतह पर किए प्रारंभिक सर्वेक्षण में महाभारत कालीन विशेषतौर पर जो मिट्टी के मृदभांड प्रयोग किए जाते थे, उन्हें आग के इतने अधिक तापमान पर पकाया जाता था कि मिट्टी का रंग लाल से बदलकर धूसर हो जाता था। उस संस्कृति के मृदभांड इतने अधिक पतले और इतने मजबूत हो जाते थे कि उनकी रगड़ से जो खनक पैदा होती थी, वह कांच जैसी प्रतीत होती है।
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बरनावा से प्राप्त चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति के अवशेष काफी अच्छी स्थिति में है। जिन्हें देखकर बरनावा टीले और क्षेत्र में प्राचीनकाल में महाभारत कालीन घटनाओं का घटित होना पुष्ट होता है। 

कुरु जनपद पर शोध करने वाले इतिहासकारों के लिए बरनावा टीला एक कौतुक का विषय रहा है, क्योंकि यह टीला मिश्रित संस्कृति का एक अनूठा उदाहरण है। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने सर्वेक्षण के परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया  

महाभारत कालीन बरनावा के प्राचीन टीले पर जहां महाभारत काल के अवशेष मिलते हैं, वहीं मौर्य, कुषाण, गुप्त, सल्तनत, मुगलकाल के भी अवशेष प्रचुर मात्रा में प्राप्त हो रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि लगभग चार हजार साल से बरनावा के इस टीले पर लगातार मानव सभ्यता का विकास होता रहा है। 

संरक्षण के लिए कई बार की गई मांग ः बड़ौत। महामना मालवीय शोध पीट के सचिव डॉ. कृष्णकांत शर्मा, मेरठ कैंटोनेमेंट हैरीटेज कमेटी के सचिव डॉ. अमित पाठक और शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने बताया बरनावा को संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल किया गया है। कई बार इस प्राचीन टीले और सभ्यता को संरक्षित करने की मांग की जा चुकी है, लेकिन कोई सार्थक पहल अभी तक शासन ने नहीं की है।

सल्तनत व मुगल काल के स्मारक मौजूद 
 बरनावा के प्राचीन टीले के विशेषता यह भी है कि यहां पर मुगल काल की स्थापत्य कला का एक अनूठा एवं कलात्मक उदाहरण गुंबद और प्राचीन इमारत के अवशेष विद्यमान है। यह मुगल कालीन स्मारक अफगान की कला संस्कृति, सभ्यता को अपने आप में समेटे हैं। इतिहासकार बताते है कि जनपद बागपत में मुगल काल की इतनी कलात्मक पुरावशेष स्मारक को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।


महाभारत काल की प्राचीन स्थलों में जहां महाभारत और कौरव और पांडव के मध्य घटित हुई घटनाओं का बरनावा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, वहीं कौरवों से संधि के रूप में पांडवों द्वारा मांगे गए पांच गांवों में भी बरनावा शामिल था। 
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