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हिंदू बहन को खून देकर बचाई जान
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बड़ौत में महिला को खून देते नौशाद मलिक
- फोटो : BARAUT
बड़ौत (बागपत)। ‘कौन हिंदू, कौन मुस्लिम, कौन सिख सरदार है, चीरकर देखों नसों को खून की एक धार है’। यह शेर बड़ौत निवासी हेल्फ लाइफ टीम संस्थापक नौशाद मलिक और उनके भांजे विकास मलिक पर सटीक बैठता है। एक हिंदू महिला को खून की जरूरत पड़ी तो दोनों ने मजहब की दीवार तोड़ कर अपना खून देकर उसकी जान बचाई। इसके लिए उन्होंने रोजे की भी फिक्र नहीं की और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की।
दरअसल, नगर की रहने वाली एक महिला को रविवार को गंभीर हालत में नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आपरेशन के दौरान महिला को खून की जरूरत पड़ी। चिकित्सकों ने परिजनों को खून की उपलब्ध कराने के लिए कहा। परिजनों ने इधर-उधर दौड़ लगाई लेकिन महिला को जिस ब्लड ग्रुप की जरूरत थी, वह नहीं मिला। इस पर परिजन परेशान हो उठे। इसकी सूचना हेल्फ लाइफ टीम के संस्थापक नौशाद मलिक और उनके भांजे विकास मलिक को लगी तो दोनों अस्पताल में पहुंचे और महिला के परिजनों के समक्ष खून देने की इच्छा जताई। परिजनों ने रजामंदी दी तो दोनों ने महिला को अपना खून दिया और उसकी जान बचाई। महिला के परिजनों ने दोनों को शुक्रिया अदा किया। अस्पताल स्टाफ ने भी दोनों की तारीफ की। इस दौरान नौशाद मलिक और विकास मलिक ने अपील की कि जिले के सभी लोग हिंदू-मुस्लिम एकता को कायम रखने के लिए बिना किसी भेद भावना के एक-दूसरे का सहयोग करें। क्योंकि मानवता से बड़ी कोई सेवा ही नहीं है।
किसी की जान बचाने के लिए रोजा तोड़कर खून देना नेक काम है। इस्लाम में इसका बहुत महत्व है। ईद के बाद तोड़े गए रोजे को रखा जा सकता है। - आरिफ उल हक, इमाम, फूंस वाली मस्जिद।
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ईद पर गुल्लक से बांट दी राहत सामग्री
बड़ौत। बड़का रोड निवासी आवाज भारत फाउंडेशन के उपाध्यक्ष नूर हसन के 12 वर्षीय बेटे शाद मलिक ने गुल्लक में रुपये एकत्रित किए, रविवार को शाद मलिक ने गुल्लक तोड़कर मिली 15 हजार रुपये की नगदी से अपने पिता नूर हसन के साथ जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्य सामग्री खरीदी और बाद में उन्हें बांट दी।
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दरअसल, नगर की रहने वाली एक महिला को रविवार को गंभीर हालत में नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आपरेशन के दौरान महिला को खून की जरूरत पड़ी। चिकित्सकों ने परिजनों को खून की उपलब्ध कराने के लिए कहा। परिजनों ने इधर-उधर दौड़ लगाई लेकिन महिला को जिस ब्लड ग्रुप की जरूरत थी, वह नहीं मिला। इस पर परिजन परेशान हो उठे। इसकी सूचना हेल्फ लाइफ टीम के संस्थापक नौशाद मलिक और उनके भांजे विकास मलिक को लगी तो दोनों अस्पताल में पहुंचे और महिला के परिजनों के समक्ष खून देने की इच्छा जताई। परिजनों ने रजामंदी दी तो दोनों ने महिला को अपना खून दिया और उसकी जान बचाई। महिला के परिजनों ने दोनों को शुक्रिया अदा किया। अस्पताल स्टाफ ने भी दोनों की तारीफ की। इस दौरान नौशाद मलिक और विकास मलिक ने अपील की कि जिले के सभी लोग हिंदू-मुस्लिम एकता को कायम रखने के लिए बिना किसी भेद भावना के एक-दूसरे का सहयोग करें। क्योंकि मानवता से बड़ी कोई सेवा ही नहीं है।
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किसी की जान बचाने के लिए रोजा तोड़कर खून देना नेक काम है। इस्लाम में इसका बहुत महत्व है। ईद के बाद तोड़े गए रोजे को रखा जा सकता है। - आरिफ उल हक, इमाम, फूंस वाली मस्जिद।
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ईद पर गुल्लक से बांट दी राहत सामग्री
बड़ौत। बड़का रोड निवासी आवाज भारत फाउंडेशन के उपाध्यक्ष नूर हसन के 12 वर्षीय बेटे शाद मलिक ने गुल्लक में रुपये एकत्रित किए, रविवार को शाद मलिक ने गुल्लक तोड़कर मिली 15 हजार रुपये की नगदी से अपने पिता नूर हसन के साथ जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्य सामग्री खरीदी और बाद में उन्हें बांट दी।