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12 गांवों में पेयजल टंकियों के लिए नहीं मिली जमीन, अटकी योजना

Fri, 13 May 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 11:39 PM IST
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Land not found for drinking water tanks in 12 villages, plan stuck
जल जीवन मिशन योजना का हाल
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पेयजल टंकियों के निर्माण के लिए जिले के 173 गांवों का हुआ था चयन, 47 गांवों में शुरू हुआ काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। शासन से संचालित जल जीवन मिशन में नई पेयजल टंकियों के निर्माण के लिए जिले के 173 गांवों का चयन किया गया था। इनमें से 162 गांवों में जगह चिह्नित होने के बाद पेयजल टंकियों के निर्माण की कवायद प्रगति में है, लेकिन जिले के 12 गांव ऐसे है, जहां जमीन ही नहीं मिली। अब इन गांवों के ग्रामीणों के लिए शुद्ध पेयजल का इंतजार बढ़ गया है।
जल जीवन मिशन में नई पेयजल टंकियों के निर्माण के लिए जिले के 173 गांवों का चयन होने के बाद जल निगम के अफसरों ने राजस्व अफसरों के साथ मिलकर जमीन तलाशनी शुरू कर दी थी। 162 गांवों में जमीन तलाशकर पेयजल टंकियों का निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। 1ि08 गांवों की डीपीआर शासन को भेजी गई जबकि 84 गांवों में बनने वाली पेयजल टंकियों का बजट जारी हो चुका है। इसमेें 47 गांवों में पेयजल टंकियों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यहां बोरिंग होने से लेकर पाइपलाइन दबाने का कार्य भी जोरों पर चल रहा है। मगर, जमीन नहीं मिलने के कारण 12 गांवों में जल जीवन योजना इन गांवों में अटककर रह गई है। अभी भी इन 12 गांवों के ग्रामीणों को पेयजल के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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इन गांवों में नहीं मिली जमीन
पिलाना ब्लाक के शोभापुर, गौसपुर, गुर्जरनगर, बिनौली ब्लाक के हिम्मतपुर, संतनगर, बड़ौत ब्लाक के माढ़ी, करीमपुर, छपरौली ब्लाक के नांगल, सूप राजपुर, तिलवाड़ा, खेकड़ा ब्लाक के नंगला बहलोलपुर, तिगरी शामिल है।
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जमीन मिलना बड़ी चुनौती, दानवीरों से इंतजार
एक साल से अधिक समय से चल रही जमीन की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। इसके चलते इन गांवों में सरकारी जमीन मिलना बड़ी चुनौती बन गया है। अब विभागीय अफसरों को पेयजल टंकियों के लिए जमीन दान करने वालों से उम्मीद है। अधिकारी गांवों के गणमान्य लोगों से मुलाकात भी कर रहे है, लेकिन जमीन नहीं मिल रही।
सबमर्सिबल वाले घरों में जाना पड़ता है पानी लेने
जल जीवन मिशन में गांव का चयन होने पर पेयजल संकट दूर होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी भी संकट खड़ा हुआ है। पूरे गांव में सिर्फ तीन हैंडपंप लगे हुए है, जिसके चलते सबमर्सिबल वाले घरों में सुबह होते ही बाल्टी लेकर पानी लेने जाना पड़ता है। - अमित कुमार, ग्रामीण संतनगर।
जब से होश संभाला है, तभी से गांव के लोग पानी के लिए संघर्ष करते नजर आते है। गांव में हैंडपंप और सबमर्सिबल से ही आपूर्ति हो पाती है। विद्युत आपूर्ति ठप होने के बाद गांव में पेयजल आपूर्ति का कोई संसाधन नहीं है। नीटू पंवार, ग्रामीण संतनगर।

सभी गांवों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए पेयजल टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। 12 गांवों में पेयजल टंकियों के लिए जमीन अभी नहीं मिली है। जमीन तलाशने के लिए तेजी लाई जा रही है। 47 गांवों में पेयजल टंकियों का निर्माण शुरू करा दिया गया है। - अविनाश गुप्ता, एक्सईएन, जल निगम, बागपत।
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