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केपी मलिक के कंधों पर होगा हरियाली बढ़ाकर पर्यावरण सुधारने का भार

Mon, 28 Mar 2022 10:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 10:54 PM IST
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KP Malik will have the burden of improving the environment by increasing greenery
केपी मलिक - फोटो : BAGHPAT
- वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मिलने पर केपी मलिक से बड़ी उम्मीदें
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- एनसीआर के जिलों में प्रदूषण की समस्या को दूर करना भी बड़ी चुनौती, योजना बनाकर करना होगा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। राज्यमंत्री केपी मलिक के कंधों पर अब हरियाली बढ़ाकर पर्यावरण को सुधारने का भार रहेगा। वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मिलने पर केपी मलिक से उम्मीदें काफी बढ़ गई है। क्योंकि बागपत और आसपास के जनपदों में प्रदूषण की बड़ी समस्या रहती है और उसका स्वास्थ्य पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में वन संपदा को बढ़ाने के लिए योजना बनाकर कार्य करना होगा।
केपी मलिक को जनहित के कार्य करने के लिए अहम विभाग वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान व जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिल्ली व एनसीआर में वन क्षेत्र धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और वाहनों में लगातार बढ़ोतरी होने से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा हरियाणा व पंजाब भी नजदीक होने के कारण धान के सीजन में पराली जलाने के कारण भी प्रदूषण बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों में प्रदूषण कम करके लोगों की सेहत को ठीक रखने की केपी मलिक के सामने बड़ी चुनौती होगी। हालांकि राज्यमंत्री केपी मलिक स्थिति को सुधारने के लिए विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर योजनाएं बनाएंगे, जिससे जनता को राहत मिल सके।
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प्रदूषण में देशभर में टॉप-5 तक पहुंच जात है बागपत
जिस बागपत से केपी मलिक विधायक है, उसी जिले में प्रदूषण के कारण बुरे हालात हो जाते है। देशभर के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में बागपत टॉप-5 में अधिकतर शामिल रहता है। कई बार पहले नंबर तक भी बागपत पहुंच जाता है। बल्कि पश्चिमी यूपी के कई अन्य जिले भी प्रदूषित शहरों की सूची में टॉप-10 तक रहते है। ऐसे में दिल्ली के आसपास के जिलों पर ज्यादा ध्यान भी देना होगा।
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उधार की जमीन में वन विभाग कार्यालय, अन्य के ऑफिस ही नहीं
राज्यमंत्री केपी मलिक के अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में उनके विभाग के ही कार्यालय नहीं है। बागपत में पर्यावरण, जंतु उद्यान व जलवायु परिवर्तन का कार्यालय नहीं है और मेरठ के कार्यालय से जिले को चलाया जाता है। वन विभाग के पास भी अपनी जमीन में कार्यालय नहीं है, बल्कि एलएमसी की जमीन पर वन विभाग का कार्यालय चल रहा है। अब नया कार्यालय बनाने के लिए जमीन की तलाश चल रही है।
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