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कृषि कानून वापस होने तक जारी रहेगा किसान आंदोलन
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विरोध: बागपत कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करते भाकियू कार्यकर्ता
- फोटो : BAGHPAT
- कलक्ट्रेट में गरजें किसान, समस्याओं के समाधान की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया। जिसमें किसान नेताओं ने कहा कि सरकार कृषि कानून वापस ले और गन्ना मूल्य घोषित करे। राष्ट्रपति के नाम मांगपत्र डीएम को सौंपा गया। किसान आंदोलन कृषि कानून वापस होने तक जारी रहेगा।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह गुर्जर ने कहा कि किसान लंबे समय से गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार सुनवाई नहीं कर रही है। अन्नदाता के साथ यह अन्याय है। सरकार को चाहिए कि एमएसपी को कानून के दायरे में लाए। किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस हों। किसानों को गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति कुंतल दिया जाए। गन्ने का बकाया भुगतान शीघ्र दिलाया जाए। डीजल से खेती के लिए किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए। बिजली नलकूप की बिजली फ्री की जाए। किसानों को साल 2008 की तर्ज पर कर्ज मुक्त किया जाए। ग्रामीण क्षेत्र में किसानों के बच्चों को शिक्षा ऋण की व्यवस्था की जाए। इस दौरान कलक्ट्रेट प्रभारी रामनयन किसानों के बीच पहुंचे और वार्ता की। इसके बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम राजकमल यादव को दस सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इस दौरान रविंद्र चेयरमैन, संजीव चौधरी, यशपाल सिंह, तेजपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, हिम्मत सिंह, गौरव कुमार, हबीब रहमान, राजेंद्र चौधरी, संजीव चौधरी आदि मौजूद रहे।
चक्का जाम को लेकर अलर्ट रही पुलिस
बागपत। किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठनों ने चक्का जाम का फैसला वापस ले लिया था, इसके बावजूद जिले में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। आरएएफ की कलक्ट्रेट पर तैनात रही। इसके अलावा बड़ौत, बागपत और खेकड़ा में भी पुलिस ने निगरानी की।
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया। जिसमें किसान नेताओं ने कहा कि सरकार कृषि कानून वापस ले और गन्ना मूल्य घोषित करे। राष्ट्रपति के नाम मांगपत्र डीएम को सौंपा गया। किसान आंदोलन कृषि कानून वापस होने तक जारी रहेगा।
भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह गुर्जर ने कहा कि किसान लंबे समय से गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार सुनवाई नहीं कर रही है। अन्नदाता के साथ यह अन्याय है। सरकार को चाहिए कि एमएसपी को कानून के दायरे में लाए। किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस हों। किसानों को गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति कुंतल दिया जाए। गन्ने का बकाया भुगतान शीघ्र दिलाया जाए। डीजल से खेती के लिए किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए। बिजली नलकूप की बिजली फ्री की जाए। किसानों को साल 2008 की तर्ज पर कर्ज मुक्त किया जाए। ग्रामीण क्षेत्र में किसानों के बच्चों को शिक्षा ऋण की व्यवस्था की जाए। इस दौरान कलक्ट्रेट प्रभारी रामनयन किसानों के बीच पहुंचे और वार्ता की। इसके बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम राजकमल यादव को दस सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इस दौरान रविंद्र चेयरमैन, संजीव चौधरी, यशपाल सिंह, तेजपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, हिम्मत सिंह, गौरव कुमार, हबीब रहमान, राजेंद्र चौधरी, संजीव चौधरी आदि मौजूद रहे।
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चक्का जाम को लेकर अलर्ट रही पुलिस
बागपत। किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठनों ने चक्का जाम का फैसला वापस ले लिया था, इसके बावजूद जिले में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। आरएएफ की कलक्ट्रेट पर तैनात रही। इसके अलावा बड़ौत, बागपत और खेकड़ा में भी पुलिस ने निगरानी की।
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