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सभी जीवो के प्रति रखे अहिंसा का भाव - अतिवीर महाराज
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खेकड़ा। नगर स्थित श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित धर्म सभा में जैन संत आचार्य अतिवीर महाराज ने कहा कि भारत देश की संस्कृति में धर्म, आध्यात्म, लोकमंगल, अहिंसा भाव और प्राणी मात्र के प्रति सद्भाव भरा है। विश्व के किसी भी देश में इन सब विचारों का अभाव है।
शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में जैन संत अतिवीर महाराज ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथजी के जीवन से हमें तीन सूत्र चरित्र में उतारने चाहिए। रक्षा के लिए असी, ज्ञान प्राप्ति के लिए मसी, जीवन यापन के लिए कृषि। क्षत्रिय के लिए असी, वैश्य के लिए मसी और किसानों के लिए कृषि उत्तम है। संसार में हमें सभी जीवों के प्रति अहिंसा का भाव रखना चाहिए। हमारे पूर्वज और कई महापुरुषों के जीवन के उज्ज्वल चरित्र इस सूत्र के साक्षी हैं कि वे तन, मन, बुद्धि, आत्मा, मस्तिष्क से शुद्ध आचरणों को अपनाकर सुखी रहें। जिस राजा के भाव प्रजा को सुखी रखने के होते हैं। उसकी प्रजा भी आदर्श अनुशासन, मर्यादित रहने के साथ ही सुखी संपन्न होती है। धर्म सभा में नरेश जैन, राकेश जैन, जिनेश जैन, अंकुश जैन, राहुल जैन, सुमेर जैन, आकाश जैन, विकास जैन, कमल जैन, प्रदीप जैन, सक्षम जैन, राजेश जैन आदि श्रद्वालु मौजूद रहे। संवाद
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शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में जैन संत अतिवीर महाराज ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथजी के जीवन से हमें तीन सूत्र चरित्र में उतारने चाहिए। रक्षा के लिए असी, ज्ञान प्राप्ति के लिए मसी, जीवन यापन के लिए कृषि। क्षत्रिय के लिए असी, वैश्य के लिए मसी और किसानों के लिए कृषि उत्तम है। संसार में हमें सभी जीवों के प्रति अहिंसा का भाव रखना चाहिए। हमारे पूर्वज और कई महापुरुषों के जीवन के उज्ज्वल चरित्र इस सूत्र के साक्षी हैं कि वे तन, मन, बुद्धि, आत्मा, मस्तिष्क से शुद्ध आचरणों को अपनाकर सुखी रहें। जिस राजा के भाव प्रजा को सुखी रखने के होते हैं। उसकी प्रजा भी आदर्श अनुशासन, मर्यादित रहने के साथ ही सुखी संपन्न होती है। धर्म सभा में नरेश जैन, राकेश जैन, जिनेश जैन, अंकुश जैन, राहुल जैन, सुमेर जैन, आकाश जैन, विकास जैन, कमल जैन, प्रदीप जैन, सक्षम जैन, राजेश जैन आदि श्रद्वालु मौजूद रहे। संवाद
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