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कौन बताए, कब तक आएंगे डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2017 12:43 AM IST
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डॉक्टर का इंतजार करते रोगी।
- फोटो : अमर उजाला
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बागपत। जिला अस्पताल में मरीजों की लाइन लगी है। ओपीडी के बाहर मरीज बैठे हैं। सुबह के करीब साढ़े दस बजे हैं, लेकिन ओपीडी में डॉक्टर साहब नहीं है। बेबस मरीज इंतजार कर रहे हैं। तीमारदार यूनुस का कहना है कि वह पिछले डेढ़ घंटे से इंतजार कर रहा है, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। महिला राजो ने कहा यदि डॉक्टर साहब ओपीडी में निर्धारित समय तक बैठे तो समस्या का समाधान हो सकता है। गर्मी के मौसम में लोग देहात से आते हैं, समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन ओपीडी में डॉक्टरों के नहीं मिलने के कारण मुश्किलें झेलनी पड़ती है।
मुख्यमंत्री महंत आदित्य नाथ ने अब डॉक्टरों पर सख्ती के संकेत दिए हैं। जिले की बात करें तो यहां स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार हैं। इसको तो खुद ही इलाज की जरूरत है। चिकित्सा और गैर चिकित्सा कर्मचारियों का टोटा जी का जंजाल बना है। जो चिकित्सक तैनात हैं, उन पर ओपीडी में नहीं बैठने का आरोप है।
मरीज इधर-उधर भटकते हैं। सबसे बुरा हाल है, देहात की स्वास्थ्य सेवाओं का। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने पिछले दिन ही डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के 18 संबद्ध रद्द किए। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिलने से मरीज प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। महंगे इलाज के कारण लोगों की कमर टूट रही है। कभी सरकारी अस्पताल मेें दवा नहीं मिलती तो कभी डॉक्टर। आए दिन मरीज हंगामा करते हैं, लेकिन सिस्टम ऐसा कि सुधरता ही नहीं।
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मुख्यमंत्री महंत आदित्य नाथ ने अब डॉक्टरों पर सख्ती के संकेत दिए हैं। जिले की बात करें तो यहां स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार हैं। इसको तो खुद ही इलाज की जरूरत है। चिकित्सा और गैर चिकित्सा कर्मचारियों का टोटा जी का जंजाल बना है। जो चिकित्सक तैनात हैं, उन पर ओपीडी में नहीं बैठने का आरोप है।
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मरीज इधर-उधर भटकते हैं। सबसे बुरा हाल है, देहात की स्वास्थ्य सेवाओं का। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने पिछले दिन ही डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के 18 संबद्ध रद्द किए। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिलने से मरीज प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। महंगे इलाज के कारण लोगों की कमर टूट रही है। कभी सरकारी अस्पताल मेें दवा नहीं मिलती तो कभी डॉक्टर। आए दिन मरीज हंगामा करते हैं, लेकिन सिस्टम ऐसा कि सुधरता ही नहीं।
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