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जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम सत्य धर्म को किया धारण
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विहर्ष सभागार में दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन सांस्कृतिक प्रस्तुति देती युवती व मोजूद जैन श्रद्
- फोटो : BARAUT
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम सत्य धर्म को धारण किया। जिनालयों में विभिन्न विधानों के बीच श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजन किया।
रविवार को मुनि विशुभ्र सागर महाराज एवं मुनि विश्वार्क सागर महाराज के सानिध्य में अजितनाथ सभागार में पारस नाथ विधान का आयोजन किया। मुनि संघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ, अजितनाथ और महावीर भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र सौरभ जैन व विपिन जैन को प्राप्त हुआ।
सौधर्म इंद्र सौरभ जैन ने मंडल पर 64 अर्घ्य अर्पित किए। विधानाचार्य पंडित राजकिंग ने दान की महिमा के संबंध में बताया और अधिक से अधिक दान देने के लिए प्रेरित किया। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, बाल्किशन जैन मौजूद रहे।
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व्यंग्य वचन सत्य होते हुए भी असत्य : विशुभ्र महाराज
विधान के मध्य में मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में सत्य का अर्थ मात्र ज्यों का त्यों बोलने का नाम सत्य नहीं है, बल्कि हित-मित-प्रिय वचन बोलने से है। हितकारी वचन यानी जिसमें जीव मात्र की भलाई हो। कहने का अर्थ है कि जिन वचनों से यदि किसी जीव का अहित होता हो तो वे वचन सत्य होते हुए भी असत्य ही हैं। मित यानी मीठा बोलो अर्थात कड़वे वचन, तीखे वचन, व्यंग्य परक वचन, परनिंदा वचन सत्य होते हुए भी असत्य ही माने गए हैं। प्रिय वचन यानी जो सुनने में भी अच्छे लगे, ऐसे वचन ही सत्य वचन हैं।
पारसनाथ विधान का किया आयोजन
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पारस नाथ विधान का भव्य आयोजन किया गया। सौधर्म राजीव कुमार जैन सार्थक जैन ने भगवान पारसनाथ को पांडुशिला पर विराजमान किया और सौधर्म इंद्र ने श्री पारसनाथ भगवान की मूल वेदिका का प्रासुक जल से अभिषेक किया। ईशान इंद्र नरेश चंद अनुज जैन ने श्री जी का अभिषेक किया। कार्यक्रम में शामिल सभी इंद्रगणों ने पारस नाथ भगवान और शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया। उसके बाद सौधर्म इंद्र राजीव जैन और ईशान इंद्र नरेश चंद जैन, कपिल जैन, संजय जैन ने शांति धारा की।
कवि सम्मेलन का आयोजन
समाशाम को सभागार में आरती के बाद युवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया। संचालन युवा कवि हिमांशु अलंकार ने किया। कवि सम्मेलन में युवा कवि अमन जैन, अमृता अमृत, अमन मित्तल, चीनू जैन, वंदना गुप्ता, यशस्वी जैन, अक्षरा शर्मा द्वारा किए काव्य पाठ को विशेष रूप से सराहा गया। कवियों का सम्मान राजेश जैन खाद वालों ने किया।
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रविवार को मुनि विशुभ्र सागर महाराज एवं मुनि विश्वार्क सागर महाराज के सानिध्य में अजितनाथ सभागार में पारस नाथ विधान का आयोजन किया। मुनि संघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ, अजितनाथ और महावीर भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र सौरभ जैन व विपिन जैन को प्राप्त हुआ।
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सौधर्म इंद्र सौरभ जैन ने मंडल पर 64 अर्घ्य अर्पित किए। विधानाचार्य पंडित राजकिंग ने दान की महिमा के संबंध में बताया और अधिक से अधिक दान देने के लिए प्रेरित किया। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, बाल्किशन जैन मौजूद रहे।
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व्यंग्य वचन सत्य होते हुए भी असत्य : विशुभ्र महाराज
विधान के मध्य में मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में सत्य का अर्थ मात्र ज्यों का त्यों बोलने का नाम सत्य नहीं है, बल्कि हित-मित-प्रिय वचन बोलने से है। हितकारी वचन यानी जिसमें जीव मात्र की भलाई हो। कहने का अर्थ है कि जिन वचनों से यदि किसी जीव का अहित होता हो तो वे वचन सत्य होते हुए भी असत्य ही हैं। मित यानी मीठा बोलो अर्थात कड़वे वचन, तीखे वचन, व्यंग्य परक वचन, परनिंदा वचन सत्य होते हुए भी असत्य ही माने गए हैं। प्रिय वचन यानी जो सुनने में भी अच्छे लगे, ऐसे वचन ही सत्य वचन हैं।
पारसनाथ विधान का किया आयोजन
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पारस नाथ विधान का भव्य आयोजन किया गया। सौधर्म राजीव कुमार जैन सार्थक जैन ने भगवान पारसनाथ को पांडुशिला पर विराजमान किया और सौधर्म इंद्र ने श्री पारसनाथ भगवान की मूल वेदिका का प्रासुक जल से अभिषेक किया। ईशान इंद्र नरेश चंद अनुज जैन ने श्री जी का अभिषेक किया। कार्यक्रम में शामिल सभी इंद्रगणों ने पारस नाथ भगवान और शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया। उसके बाद सौधर्म इंद्र राजीव जैन और ईशान इंद्र नरेश चंद जैन, कपिल जैन, संजय जैन ने शांति धारा की।
कवि सम्मेलन का आयोजन
समाशाम को सभागार में आरती के बाद युवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया। संचालन युवा कवि हिमांशु अलंकार ने किया। कवि सम्मेलन में युवा कवि अमन जैन, अमृता अमृत, अमन मित्तल, चीनू जैन, वंदना गुप्ता, यशस्वी जैन, अक्षरा शर्मा द्वारा किए काव्य पाठ को विशेष रूप से सराहा गया। कवियों का सम्मान राजेश जैन खाद वालों ने किया।

बरनावा के जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।- फोटो : BARAUT