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बीमारी में मेरठ-दिल्ली तो खरीदारी के लिए सोनीपत-नोएडा तक दौड़
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बागपत की शौकत मार्किट में खरीदारी के लिए पहुंचे लोग
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत। 20 साल में शहर का दायरा भले ही बढ़कर गांवों से आगे तक पहुंच गया हो, लेकिन वक्त की मांग के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं तक बेहतर नहीं हो सकी तो बाजार भी सीमित रहा। आज भी मरीजों को मेरठ व दिल्ली लेकर जाना पड़ता है। कपड़ों सहित अन्य सामान की खरीदारी के लिए भी सोनीपत और नोएडा की दौड़ लगानी पड़ती है।
वर्ष 2001 के बाद शहर की जहां आबादी कई गुना बढ़ गई है, वहीं दायरा बढ़कर गांवों से आगे तक पहुंच गया है। इसके बावजूद वक्त के अनुसार सुविधाएं आज भी अधूरी है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करीब 15 निजी डाक्टरों के क्लीनिक है। पांच निजी व एक जिला अस्पताल है। यह कहने के लिए अस्पताल है, लेकिन इनमें गंभीर बीमारी व इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा तक नहीं मिलती है। मरीजों को इन अस्पतालों में लेकर पहुंचते है तो उनको दिल्ली व मेरठ रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा आधुनिकता के अनुसार बाजार भी विकसित नहीं हो सका है। करीब 400 दुकानें है, लेकिन शॉपिंग मॉल, बड़ी कंपनियों के शोरूम अभी तक नहीं बन सके है। शादियों के लिए कपड़े व अन्य सामान की खरीदारी के लिए सोनीपत व नोएडा जाना पड़ता है। 20 साल में यहां स्वास्थ्य सेवाएं व बाजार पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।
स्वास्थ्य सेवाएं आबादी व वक्त के अनुसार बेहतर नहीं हो सकी है। अगर किसी को इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा की जरूरत होती है तो मेरठ व दिल्ली ही मरीज को लेकर जाना पड़ता है। यहां के अस्पतालों से गंभीर बीमारी में मरीजों को केवल रेफर कर दिया जाता है। - भारत गौरव, समाजसेवी
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बाजार में करीब 400 दुकान है, लेकिन नगर पालिका से सुविधाएं कुछ नहीं मिल रही है। बाजार में शौचालय तक नहीं है तो साफ-सफाई तक की व्यवस्था नहीं है। इसलिए भी लोग यहां आने से कतराते है और इस वजह से व्यापार नहीं होने के कारण कोई बड़ी दुकान व शोरूम नहीं खुलता है। - पीयूष जैन, व्यापारी
नगर पालिका केवल अतिक्रमण के नाम पर मोटा जुर्माना वसूलती है और व्यापारियों को सुविधा कुछ नहीं देती है। सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाए तो मॉल, बड़े शोरूम भी खुल सकते है। - नंदलाल डोगरा, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार एसोसिएशन
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वर्ष 2001 के बाद शहर की जहां आबादी कई गुना बढ़ गई है, वहीं दायरा बढ़कर गांवों से आगे तक पहुंच गया है। इसके बावजूद वक्त के अनुसार सुविधाएं आज भी अधूरी है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करीब 15 निजी डाक्टरों के क्लीनिक है। पांच निजी व एक जिला अस्पताल है। यह कहने के लिए अस्पताल है, लेकिन इनमें गंभीर बीमारी व इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा तक नहीं मिलती है। मरीजों को इन अस्पतालों में लेकर पहुंचते है तो उनको दिल्ली व मेरठ रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा आधुनिकता के अनुसार बाजार भी विकसित नहीं हो सका है। करीब 400 दुकानें है, लेकिन शॉपिंग मॉल, बड़ी कंपनियों के शोरूम अभी तक नहीं बन सके है। शादियों के लिए कपड़े व अन्य सामान की खरीदारी के लिए सोनीपत व नोएडा जाना पड़ता है। 20 साल में यहां स्वास्थ्य सेवाएं व बाजार पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।
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स्वास्थ्य सेवाएं आबादी व वक्त के अनुसार बेहतर नहीं हो सकी है। अगर किसी को इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा की जरूरत होती है तो मेरठ व दिल्ली ही मरीज को लेकर जाना पड़ता है। यहां के अस्पतालों से गंभीर बीमारी में मरीजों को केवल रेफर कर दिया जाता है। - भारत गौरव, समाजसेवी
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बाजार में करीब 400 दुकान है, लेकिन नगर पालिका से सुविधाएं कुछ नहीं मिल रही है। बाजार में शौचालय तक नहीं है तो साफ-सफाई तक की व्यवस्था नहीं है। इसलिए भी लोग यहां आने से कतराते है और इस वजह से व्यापार नहीं होने के कारण कोई बड़ी दुकान व शोरूम नहीं खुलता है। - पीयूष जैन, व्यापारी
नगर पालिका केवल अतिक्रमण के नाम पर मोटा जुर्माना वसूलती है और व्यापारियों को सुविधा कुछ नहीं देती है। सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाए तो मॉल, बड़े शोरूम भी खुल सकते है। - नंदलाल डोगरा, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार एसोसिएशन