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भगवान की भक्ति में लीन होने से जीवन बनेगा सुखमय : चंद्रमति
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-बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में हुआ भक्तांबर महामंडल विधान
फोटो नंबर 10केएआर 1
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में रविवार को भक्तांबर महामंडल विधान हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की नित्य नियम पूजा की और विशेष अनुष्ठान किए। धर्म सभा में चंद्रमति माता ने मानव सेवा को भगवान की सच्ची भक्ति बताया।
विधान की शुरुआत भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, शांतिधारा और मंडप की शुद्धि के साथ हुई। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने 48 दीपों से भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की। धर्म सभा को संबोधित करते हुए चंद्रमति माता ने कहा कि मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। उन्होंने जोर दिया कि दीन-दुखियों की पीड़ा को समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाता है। चंद्रमति माता ने श्रद्धालुओं से भगवान की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सुखमय बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि परोपकार और सेवा भाव से ही मनुष्य का वास्तविक कल्याण संभव है। इस अवसर पर त्रिलोकचंद जैन, श्यामलाल जैन, अभिषेक जैन, दीपक जैन, संदीप जैन और महेश जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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फोटो नंबर 10केएआर 1
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में रविवार को भक्तांबर महामंडल विधान हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की नित्य नियम पूजा की और विशेष अनुष्ठान किए। धर्म सभा में चंद्रमति माता ने मानव सेवा को भगवान की सच्ची भक्ति बताया।
विधान की शुरुआत भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, शांतिधारा और मंडप की शुद्धि के साथ हुई। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने 48 दीपों से भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की। धर्म सभा को संबोधित करते हुए चंद्रमति माता ने कहा कि मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। उन्होंने जोर दिया कि दीन-दुखियों की पीड़ा को समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाता है। चंद्रमति माता ने श्रद्धालुओं से भगवान की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सुखमय बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि परोपकार और सेवा भाव से ही मनुष्य का वास्तविक कल्याण संभव है। इस अवसर पर त्रिलोकचंद जैन, श्यामलाल जैन, अभिषेक जैन, दीपक जैन, संदीप जैन और महेश जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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