जूते के लिए रुपये न मिलने पर मौत को गले लगाया
गाजियाबाद के डासना निवासी इरशाद अपने परिवार के साथ पिछले 13 वर्षों से रटौल अपनी ससुराल में रह रहा है। वह गाजियाबाद में मजदूरी करता है। उसका बेटा दिलशाद गांव में ही मिस्त्री के पास बाइक रिपेयरिंग का काम सीख रहा था। बताया जाता है कि शनिवार सुबह करीब 10 बजे दिलशाद दुकान से अपने घर पर पहुंचा और अपनी मां सितारा से जूते के लिए रुपये मांगने लगा। सितारा ने उसे रुपये देने से मना कर दिया। इसी से क्षुब्ध होकर दिलशाद ने मफरल का फंदा लगाकर कमरे के गाटर पर लटक गया। उसके चिल्लाने पर उसकी मां कमरे में पहुंची। उसने बेटे को बचाने का प्रयास किया। शोर सुनकर आस पड़ोस के लोग वहां पहुंचे और दिलशाद को अस्पताल ले गए। जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एक-एक रुपये को मोहताज परिवार
चांदीनगर। सितारा ने रोते हुए कहा कि 1000 और 500 रुपये के नोट बंद होने के कारण उसके पास रुपये नहीं है। कई बार गांव में बैंक में लाइन में लगी, लेकिन उसको रुपये नहीं मिले। हालत है कि घर के खर्च के लिए एक-एक रुपये के लिए मोहताज है। इसी कारण अपने बेटे को जूते के लिए रुपये नहीं दे पाई थी।
सात बहनों में अकेला भाई था दिलशाद
चांदीनगर। दिलशाद, अपनी सात बहनों में अकेला भाई था। दिलशाद की मौत होने से घर का चिराग बुझ गया। उसकी मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।
कुलदीप उज्ज्वल ने परिवार को दी सांत्वना
चांदीनगर। सपा के बागपत विधानसभा प्रत्याशी डॉ. कुलदीप उज्ज्वल घटना का पता चलते ही गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी साथ ही मुख्यमंत्री से आर्थिक मद्द कराने का आश्वासन दिया।