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मांगी मन्नत हुई पूरी तो हरिद्वार से लाए कांवड़

Sat, 23 Jul 2022 11:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2022 11:09 PM IST
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If the desired vow is fulfilled, then the Kanwars brought from Haridwar
बागपत : उम्र है छोटी हौसले हैं बड़े, बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग पर परिजनों के साथ गंगाजल लेकर गुजरते शिवभ? - फोटो : BARAUT
मांगी मन्नत हुई पूरी तो हरिद्वार से लाए कांवड़
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बड़ौत (बागपत)। यह भगवान शिव के प्रति आस्था ही है जो खेलने-कूदने और मौज, मस्ती की उम्र में भक्ति में लीन होकर छोटे-छोटे बच्चे हरिद्वार, ऋषिकेश से अपने परिजनों के साथ कांवड़ ला रहे हैं। इस बार कांवड़ यात्रा का नजारा महिलाओं और बच्चों की संख्या को देखकर बदला हुआ सा नजर आ रहा है। हर कदम पर छोटे-छोटे बच्चे दूसरे शिवभक्त कांवड़ियों में हौसला भर रहे हैं।
मांगी मन्नत, तो लौट आई बेटे की आंखों की रोशनी
कोई परिवार की सुख, शांति के लिए तो कोई पूरी हुई मन्नतों के बाद कांवड़ ला रहा है। सोनीपत निवासी जगदीश अपनी पत्नी ममता के साथ दसवीं बार कांवड़ लेकर आए हैं। उनके साथ पहली बार उनके दो पोते, जिसमें तीन साल का यश व साढ़े तीन साल का रॉकी भी शामिल था। जगदीश ने बताया कि 15 साल पहले बेटे राकेश की दोनों आंखों में नुकीली चीजें घुस गईं थीं। इसके बाद राकेश का ऑपरेशन भी कराया, लेकिन आंखों से साफ दिखाई नहीं दे रहा था, मानो आंखों की रोशनी चली गई हो। तभी जगदीश ने राकेश को हरिद्वार ले जाकर राकेश की आंखों की रोशनी के लिए मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी हुई तो जगदीश, उसकी पत्नी ममता की भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था बढ़ी और तभी से दोनों कांवड़ ला रहे हैं। इस बार राकेश ने अपने दोनों बेटों को भी भगवान भोलेनाथ की शरण में भेजा।
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- भगवान से मांगी मन्नत, तो सुधरी मूक बाधिर बच्चे की हालत
खरखौदा जनपद सोनीपत निवासी सोनू भी अपनी छह साल की बेटी जाह्नवी के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर बड़ौत पहुंचा। सोनू ने बताया कि छह बेटियों के काफी समय बाद एक बेटा हुआ था। जो सही से न तो बैठ पाता था, न सही सुन पाता था और न ही बोल पाता था। भगवान से मन्नत मांगी तो बच्चा बैठने भी लगा और अब सही ढंग से बोलने व सुनने लगा। यह सोनू की 12वीं कांवड़ है। इस बार वह अपनी बेटी जाह्नवी को लेकर भगवान भोलेनाथ के दरबार हरिद्वार पहुंचा।
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