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मधु के तीर चले तो बरसा सोना

Wed, 14 Sep 2016 01:59 AM IST
Updated Wed, 14 Sep 2016 01:59 AM IST
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If it were to rain arrows honey gold
धनौरा में वेदवान एकेडमी में खुशी जाहिर करते तीरंदाज। - फोटो : अमर उजाला
बागपत। अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी में धनौरा की बेटी का कोई जवाब नहीं है। सिर्फ सात साल का कॅरियर और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदकों की संख्या 35 से भी अधिक। 
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पंजाब यूनिवर्सिटी से बीए कर रही मधु के तीर हमेशा निशाने पर लगे हैं। धनौरा की मधु वेदवान का खेल कॅरियर में कई संघर्ष करने पड़े। पहले मधु ने हॉकी खेलना शुरू किया था, लेकिन चोट लग गई। इसके बाद उसने जूडो कराटे में किस्मत आजमाई, लेकिन यहां भी बात नहीं बनी।
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साथियों की सलाह से मधु ने तीरंदाजी का विकल्प चुना तो जिंदगी और खेल कॅरियर के रंग ही बदल गए। साल 2009 में वेदवान ने तीरंदाजी की शुरूआत की थी। एशिया वर्ल्ड रैंकिंग में डबल स्वर्ण जीतने वाले इस बेटी ने अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 13 और कुल 35 से अधिक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर पहचान पुख्ता की है।
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यूनिवर्सिटी के खेलों में मधु के तीरों ने पूरी दुनिया में तहलका मचाया। धनौरा गांव के ब्रहम पाल सिंह की बेटी मधु वेदवान की माता का निधन बचपन में ही हो गया था।  वह बड़ी बहन
नीरज को  आइडियल मानती है। उसी ने प्रेरित किया है।
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