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सिनौली की जमीन से निकला इतिहास, जिले को मिली नई पहचान
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सिनौली खनन के दौरान मिले रथ को दिखाते हुए फाइल फोटो
- फोटो : BAGHPAT
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अमर उजाला स्थापना दिवस
सिनौली की खुदाई में करीब साढ़े तीन हजार साल पुराने इतिहास की हो चुकी पुष्टि
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जिले का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। बरनावा में लाक्षागृह होने की बात कही जाती रही है। पुरातत्व महत्व के स्थानों के विकास के लिए जिले को महाभारत सर्किट में भी शामिल किया गया था। सिनौली की खुदाई में करीब साढ़े तीन हजार साल पुराने इतिहास की पुष्टि हो चुकी है।
सिनौली में उत्खनन स्थल की जमीन को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर दिया है। पुरातत्व विभाग के आगरा सर्किल की ओर से चिह्नित जमीन की तारबंदी कराई जाएगी। जमीन से एतिहासिक रथ ने जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। सिनौली में पहली बार कराए गए उत्खनन में हड़प्पा कालीन शवादान ग्रह मिला था, जबकि दूसरी बार कराए गए उत्खनन में जिले के प्राचीन इतिहास की गवाही देता रथ और तलवार निकली थी। पुरातत्व विभाग की टीम शोध में जुटी है। बरनावा और सिनौली में उत्खनन से जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। जून 2017 में उत्खनन में रथ निकला, जिससे यहां की सभ्यता पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई। सिनौली के अलावा करीब पांच हजार साल पहले सिर्फ मेसोपोटामिया, ग्रीक और जॉर्जिया की सभ्यता में इस तरह के रथ मिलने के प्रमाण मिले थे।
पुरातत्व विभाग की टीम ने साल 2018 की शुरूआत में बरनावा में उत्खनन कार्य शुरू किया था। साल 2006-07 में भी यहां उत्खनन हुआ था, तब हड़प्पाकालीन कब्रगाह मिला था। पुरातत्वविदों ने बताया कि सिनौली जैसे रथ सिर्फ मेसोपोटामिया, जार्जिया और ग्रीक सभ्यता में ही मिले हैं। जाहिर है कि यहां की सभ्यता की तरह ही भारतीय उपमहाद्वीप के लोग भी रथ का प्रयोग करते थे और यहां की सभ्यता भी बेहद विकसित थी।
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सिनौली की खुदाई में करीब साढ़े तीन हजार साल पुराने इतिहास की हो चुकी पुष्टि
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जिले का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। बरनावा में लाक्षागृह होने की बात कही जाती रही है। पुरातत्व महत्व के स्थानों के विकास के लिए जिले को महाभारत सर्किट में भी शामिल किया गया था। सिनौली की खुदाई में करीब साढ़े तीन हजार साल पुराने इतिहास की पुष्टि हो चुकी है।
सिनौली में उत्खनन स्थल की जमीन को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर दिया है। पुरातत्व विभाग के आगरा सर्किल की ओर से चिह्नित जमीन की तारबंदी कराई जाएगी। जमीन से एतिहासिक रथ ने जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। सिनौली में पहली बार कराए गए उत्खनन में हड़प्पा कालीन शवादान ग्रह मिला था, जबकि दूसरी बार कराए गए उत्खनन में जिले के प्राचीन इतिहास की गवाही देता रथ और तलवार निकली थी। पुरातत्व विभाग की टीम शोध में जुटी है। बरनावा और सिनौली में उत्खनन से जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। जून 2017 में उत्खनन में रथ निकला, जिससे यहां की सभ्यता पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई। सिनौली के अलावा करीब पांच हजार साल पहले सिर्फ मेसोपोटामिया, ग्रीक और जॉर्जिया की सभ्यता में इस तरह के रथ मिलने के प्रमाण मिले थे।
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पुरातत्व विभाग की टीम ने साल 2018 की शुरूआत में बरनावा में उत्खनन कार्य शुरू किया था। साल 2006-07 में भी यहां उत्खनन हुआ था, तब हड़प्पाकालीन कब्रगाह मिला था। पुरातत्वविदों ने बताया कि सिनौली जैसे रथ सिर्फ मेसोपोटामिया, जार्जिया और ग्रीक सभ्यता में ही मिले हैं। जाहिर है कि यहां की सभ्यता की तरह ही भारतीय उपमहाद्वीप के लोग भी रथ का प्रयोग करते थे और यहां की सभ्यता भी बेहद विकसित थी।
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