{"_id":"5dacae078ebc3e0178342f90","slug":"health-is-necessory-baghpat-news-mrt4494946134","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वस्थ शरीर ही मनुष्य के सुखों का आधार : यज्ञमुनि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वस्थ शरीर ही मनुष्य के सुखों का आधार : यज्ञमुनि
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वस्थ शरीर ही मनुष्य के सुख का आधार : यज्ञमुनि
दोघट (बागपत)। यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी यज्ञ मुनि ने कहा कि जीवन को सुंदर एवं सुखमय बनाने के लिए स्वास्थ्य व स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखा जाए। स्वस्थ शरीर ही मनुष्य के सुख का आधार होता है।
आर्य समाज गढ़ी कांगरान में चल रहे ऋग्वेद खंड पारायण यज्ञ के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सफलता भी तभी संभव हो सकती है, जब वातावरण शुद्ध होगा। यज्ञ से ही वातावरण शुद्ध किया जा सकता है। आचार्य धन कुमार शास्त्री ने कहा कि यज्ञ हमारी संस्कृति है। मन, वचन और कर्म को एक सूत्र में बांधकर यज्ञ रूपी नौका में सवार होकर ही मनुष्य भव सागर को पार कर सकता है। पंडित सत्यपाल आर्य ने कहा कि वेद परमात्मा की वाणी है। वेद मार्ग पर चलकर ही मनुष्य जीवन में सुख, शांति प्राप्त कर सकता है। वेदपाठ विदुषी आर्या, आभा आर्या तथा मानसी आर्या ने किया। यज्ञमान देव, नेहा, मनोज, सीमा रहे। यज्ञ में प्रधान हवन पाल, परमवीर आर्य, सुधीर तोमर, पवन शास्त्री, राजवीर, इंद्रपाल तोमर, धीरेंद्र तोमर, सुनील तोमर आदि रहे।
विज्ञापन
दोघट (बागपत)। यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी यज्ञ मुनि ने कहा कि जीवन को सुंदर एवं सुखमय बनाने के लिए स्वास्थ्य व स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखा जाए। स्वस्थ शरीर ही मनुष्य के सुख का आधार होता है।
आर्य समाज गढ़ी कांगरान में चल रहे ऋग्वेद खंड पारायण यज्ञ के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सफलता भी तभी संभव हो सकती है, जब वातावरण शुद्ध होगा। यज्ञ से ही वातावरण शुद्ध किया जा सकता है। आचार्य धन कुमार शास्त्री ने कहा कि यज्ञ हमारी संस्कृति है। मन, वचन और कर्म को एक सूत्र में बांधकर यज्ञ रूपी नौका में सवार होकर ही मनुष्य भव सागर को पार कर सकता है। पंडित सत्यपाल आर्य ने कहा कि वेद परमात्मा की वाणी है। वेद मार्ग पर चलकर ही मनुष्य जीवन में सुख, शांति प्राप्त कर सकता है। वेदपाठ विदुषी आर्या, आभा आर्या तथा मानसी आर्या ने किया। यज्ञमान देव, नेहा, मनोज, सीमा रहे। यज्ञ में प्रधान हवन पाल, परमवीर आर्य, सुधीर तोमर, पवन शास्त्री, राजवीर, इंद्रपाल तोमर, धीरेंद्र तोमर, सुनील तोमर आदि रहे।
विज्ञापन