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Baghpat News: एचएफएमडी बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट
सार
बागपत में एचएफएमडी बीमारी के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के लिए जिला अस्पताल व सीएचसी में अलग वार्ड बनाए हैं। अभी तक कोई बच्चा संक्रमित नहीं है, लेकिन सतर्कता व जागरूकता के निर्देश जारी किए गए हैं।
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विस्तार
बागपत। एचएफएमडी (हैंड फुट एंड माउथ डिसीज) बीमारी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश हैं और गंभीर बच्चों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल व सीएचसी में अलग से वार्ड बना लिया है। वहां उनको भर्ती करके उपचार किया जा सकेगा।
एचएफएमडी बीमारी की चपेट में अभी तक एक भी बच्चा नहीं आया है मगर अन्य कई जगहों पर बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही बचाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर ने बताया कि इस बीमारी की चपेट में आने से बच्चो में चिड़चिड़ापन आता है। बीमारी की पहचान बच्चे को बुखार आना, मुंह में छाले पड़ना, त्वचा पर लाल निशान होना, भूख की कमी, थकावट व गले में खराश होना है। इसके अलावा बुखार के दो दिन बाद मुंह के अंदर छोटे लाल दाग दिखाई देना और जीभ, मसूड़े, गाल के अंदर, हथेली व तलवों पर लाल निशान होना बीमारी के लक्षण है। उन्होंने लोगों को बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
-- ये बरतें सावधानी
- संक्रमित बच्चे को दूसरे बच्चे के संपर्क में आने से बचाएं
- बच्चे को इसके लक्षणों की जानकारी दें
- बच्चे को संक्रमित पीड़ितों से छूने व गले मिलने से रोकें
- स्वच्छता बनाए रखे और अंगूठा व उंगली चूसने की आदत से बचें
- खांसी आने पर रुमाल का प्रयोग करें
- फफोलों को न खुजाएं, छूने पर हाथ धोएं
- बच्चों को पानी, दूध, जूस पीने के लिए प्रोत्साहित करें
- बर्तन, कपड़े और उपयोग की अन्य वस्तु अलग रखें
- गर्म पानी से त्वचा साफ करें और स्नान करें
- पोषणयुक्त संतुलित आहार दें, ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े
- पर्याप्त नींद लें और आराम करें
--
जिला अस्पताल में दस बेड का वार्ड बनाया गया है। कोई बच्चा इस बीमारी से ग्रसित होता है तो उसको सबसे अलग इस वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इससे बचाव के लिए पहले ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है जिससे वह बच्चों को इसकी चपेट में आने से बचाएं। - डॉ. तीरथलाल, सीएमओ
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एचएफएमडी बीमारी की चपेट में अभी तक एक भी बच्चा नहीं आया है मगर अन्य कई जगहों पर बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही बचाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर ने बताया कि इस बीमारी की चपेट में आने से बच्चो में चिड़चिड़ापन आता है। बीमारी की पहचान बच्चे को बुखार आना, मुंह में छाले पड़ना, त्वचा पर लाल निशान होना, भूख की कमी, थकावट व गले में खराश होना है। इसके अलावा बुखार के दो दिन बाद मुंह के अंदर छोटे लाल दाग दिखाई देना और जीभ, मसूड़े, गाल के अंदर, हथेली व तलवों पर लाल निशान होना बीमारी के लक्षण है। उन्होंने लोगों को बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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- संक्रमित बच्चे को दूसरे बच्चे के संपर्क में आने से बचाएं
- बच्चे को इसके लक्षणों की जानकारी दें
- बच्चे को संक्रमित पीड़ितों से छूने व गले मिलने से रोकें
- स्वच्छता बनाए रखे और अंगूठा व उंगली चूसने की आदत से बचें
- खांसी आने पर रुमाल का प्रयोग करें
- फफोलों को न खुजाएं, छूने पर हाथ धोएं
- बच्चों को पानी, दूध, जूस पीने के लिए प्रोत्साहित करें
- बर्तन, कपड़े और उपयोग की अन्य वस्तु अलग रखें
- गर्म पानी से त्वचा साफ करें और स्नान करें
- पोषणयुक्त संतुलित आहार दें, ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े
- पर्याप्त नींद लें और आराम करें
जिला अस्पताल में दस बेड का वार्ड बनाया गया है। कोई बच्चा इस बीमारी से ग्रसित होता है तो उसको सबसे अलग इस वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इससे बचाव के लिए पहले ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है जिससे वह बच्चों को इसकी चपेट में आने से बचाएं। - डॉ. तीरथलाल, सीएमओ
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