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Baghpat News: हेड कांस्टेबल ने फिर जारी की वीडियो
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। प्रदेश में पुलिसकर्मियों की मौत होने पर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले हेड कांस्टेबल ओमवीर सिंह राजपूत ने लाइन हाजिर होने के बीस दिन बाद फिर से एक वीडियो फेसबुक पर जारी की। 15 मिनट 5 सेकंड की वीडियो में हेड कांस्टेबल ने कहा कि 1861 में पुलिस एक्ट बना था और आजादी मिलने के बाद भी पुलिसकर्मियों को अपनी बात रखने की आजादी नहीं मिली। देश में आतंकवादी को अपनी बात रखने, पसंद का वकील रखने और पसंद का खाना खाने की अनुमति है, लेकिन पुलिसकर्मियों को बोलने की भी अनुमति नहीं है।
बिनौली थाने में तैनात रहे बुलंदशहर के रहने वाले हेड कांस्टेबल ओमवीर सिंह राजपूत ने 30 अगस्त को फेसबुक आईडी पर अपनी एक वीडियो अपलोड की थी, जिसमें उन्होंने बस्ती में तैनात एक महिला सिपाही की मौत के बाद विभाग पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि घायल सिपाही छुट्टी नहीं मिलने के कारण उपचार नहीं करा पाई, जिससे उसकी मौत हो गई। वीडियो अपलोड होने पर अफसरों ने पुलिस एक्ट का उल्लंघन मानते हुए हेड कांस्टेबल ओमवीर सिंह राजपूत को लाइन हाजिर कर दिया था। साथ ही मानसिक हालत ठीक नहीं होने की बात कहते हुए काउंसिलिंग भी कराई गई।
अब सोमवार को हेड कांस्टेबल ने 15 मिनट 5 सेकंड की वीडियो अपलोड की। वीडियो में हेड कांस्टेबल ने प्रदेश के डीजीपी से गुहार लगाते हुए कहा कि वीडियो में अपनी व्यक्तिगत समस्या नहीं उठाई, उसमें सिर्फ पुलिसकर्मियों के आत्महत्या करने पर सवाल किया गया था, जिसमें न तो किसी पर आरोप लगाया गया और न ही किसी का विरोध किया। वीडियो अपलोड होने के 15 दिन बाद तक पूरे प्रदेश में आठ सिपाहियों और दरोगाओं की आत्महत्या व हादसे में जान जा चुकी है। इसमें हापुड़, बुलंदशहर, कौशांबी, अंबेडकरनगर, बस्ती, मुरादाबाद और मथुरा की घटनाएं शामिल हैं। कई पुलिसकर्मी तो अपने परिवार के इकलौते बेटे भी थे।
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हेड कांस्टेबल ने कहा कि 1861 में पुलिस एक्ट बना था और आजादी मिलने के बाद भी पुलिसकर्मियों को अपनी बात रखने की आजादी नहीं मिली। देश में आतंकवादी को अपनी बात रखने, पसंद का वकील रखने और पसंद का खाना खाने की अनुमति है, लेकिन पुलिसकर्मियों को बोलने की भी अनुमति नहीं है। कहा कि फेसबुक पर अपने व्यक्तिगत समस्या नहीं उठाई, बल्कि पूरे पुलिस परिवार की सामाजिक समस्या उठाई थी और उसका समाधान भी बताया था। बॉर्डर स्कीम हटने से पुलिसकर्मियों पर मानसिक दबाव कम होगा और आत्महत्या की घटनाओं में कमी आएगी, क्योंकि घर से दूर अकेले रहने वाले पुलिसकर्मियों के साथ आत्महत्या करने की घटनाएं होती हैं।
-मेरी मां से नहीं मिले अफसर
हेड कांस्टेबल ओमवीर ने कहा कि कुछ दिन पहले उनकी बुजुर्ग मां अपने पोते के साथ ट्रेन से लखनऊ गई थी, लेकिन वहां पर अफसरों ने उनसे मुलाकात नहीं की। इसके अलावा एक बार मेरठ में भी अफसर ने उनसे मुलाकात नहीं की और बाहर बैठाकर वापस भेज दिया गया, जबकि फरियादी से मिलने की सभी की जिम्मेदारी है। अन्य लोगों की सीधी मुलाकात भी कराई गई। उन्होंने कहा कि मेरी मां के साथ दो बार ऐसा हो चुका है, इससे महसूस होता है कि पुलिसकर्मियों के परिवारों का कोई सम्मान नहीं है। वीडियो के अंतिम में उन्होंने कहा कि फेसबुक पर वीडियो अपलोड करने पर उसे लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके बाद मानसिक स्थिति खराब होने का बयान भी जारी किया गया, जबकि उसकी मानसिक हालत ठीक है, लेकिन अब ऐसे हालात में परेशानी होने लगी है।
-मेरी तरह दूसरा कोई वीडियो डाले, उससे पहले समीक्षा करा लो...
हेड कांस्टेबल ने कहा कि मेरी मानसिक हालत ठीक नहीं होने के बयान से मेरी मां और परिचित भी परेशान हो गए, जिन्होंने फोन करके जानकारी भी की। परिवार के लोग भी काफी चिंतित हैं। बताया कि मेरी मां की दो बार हालत बिगड़ चुकी है। वीडियो अपलोड करने का उद्देश्य सिर्फ पुलिसकर्मियों की मौतों पर प्रकाश डालना है। उन्होंने कहा कि हर दूसरे दिन पुलिसकर्मी आत्महत्या कर रहे हैं, जो एक सामाजिक समस्या है। पुलिस वेलफेयर में आने वाली शिकायतों का संज्ञान लेकर बॉर्डर स्कीम हटाई जाए। मुझे लाइन हाजिर के बजाय समीक्षा करने के आदेश जारी किए जाते तो अच्छा होता। मेरी तरह दूसरा पुलिसकर्मी ऐसी वीडियो न डाले, उससे पहले समीक्षा कराकर समाधान करा लिया जाए।
वर्जन
पहले हेड कांस्टेबल की काउंसिलिंग भी कराई गई। अब दोबारा वीडियो जारी के मामले में सीओ को जांच सौंपी गई है, उनकी जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -सूरज कुमार राय, एसपी
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बिनौली। प्रदेश में पुलिसकर्मियों की मौत होने पर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले हेड कांस्टेबल ओमवीर सिंह राजपूत ने लाइन हाजिर होने के बीस दिन बाद फिर से एक वीडियो फेसबुक पर जारी की। 15 मिनट 5 सेकंड की वीडियो में हेड कांस्टेबल ने कहा कि 1861 में पुलिस एक्ट बना था और आजादी मिलने के बाद भी पुलिसकर्मियों को अपनी बात रखने की आजादी नहीं मिली। देश में आतंकवादी को अपनी बात रखने, पसंद का वकील रखने और पसंद का खाना खाने की अनुमति है, लेकिन पुलिसकर्मियों को बोलने की भी अनुमति नहीं है।
बिनौली थाने में तैनात रहे बुलंदशहर के रहने वाले हेड कांस्टेबल ओमवीर सिंह राजपूत ने 30 अगस्त को फेसबुक आईडी पर अपनी एक वीडियो अपलोड की थी, जिसमें उन्होंने बस्ती में तैनात एक महिला सिपाही की मौत के बाद विभाग पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि घायल सिपाही छुट्टी नहीं मिलने के कारण उपचार नहीं करा पाई, जिससे उसकी मौत हो गई। वीडियो अपलोड होने पर अफसरों ने पुलिस एक्ट का उल्लंघन मानते हुए हेड कांस्टेबल ओमवीर सिंह राजपूत को लाइन हाजिर कर दिया था। साथ ही मानसिक हालत ठीक नहीं होने की बात कहते हुए काउंसिलिंग भी कराई गई।
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अब सोमवार को हेड कांस्टेबल ने 15 मिनट 5 सेकंड की वीडियो अपलोड की। वीडियो में हेड कांस्टेबल ने प्रदेश के डीजीपी से गुहार लगाते हुए कहा कि वीडियो में अपनी व्यक्तिगत समस्या नहीं उठाई, उसमें सिर्फ पुलिसकर्मियों के आत्महत्या करने पर सवाल किया गया था, जिसमें न तो किसी पर आरोप लगाया गया और न ही किसी का विरोध किया। वीडियो अपलोड होने के 15 दिन बाद तक पूरे प्रदेश में आठ सिपाहियों और दरोगाओं की आत्महत्या व हादसे में जान जा चुकी है। इसमें हापुड़, बुलंदशहर, कौशांबी, अंबेडकरनगर, बस्ती, मुरादाबाद और मथुरा की घटनाएं शामिल हैं। कई पुलिसकर्मी तो अपने परिवार के इकलौते बेटे भी थे।
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हेड कांस्टेबल ने कहा कि 1861 में पुलिस एक्ट बना था और आजादी मिलने के बाद भी पुलिसकर्मियों को अपनी बात रखने की आजादी नहीं मिली। देश में आतंकवादी को अपनी बात रखने, पसंद का वकील रखने और पसंद का खाना खाने की अनुमति है, लेकिन पुलिसकर्मियों को बोलने की भी अनुमति नहीं है। कहा कि फेसबुक पर अपने व्यक्तिगत समस्या नहीं उठाई, बल्कि पूरे पुलिस परिवार की सामाजिक समस्या उठाई थी और उसका समाधान भी बताया था। बॉर्डर स्कीम हटने से पुलिसकर्मियों पर मानसिक दबाव कम होगा और आत्महत्या की घटनाओं में कमी आएगी, क्योंकि घर से दूर अकेले रहने वाले पुलिसकर्मियों के साथ आत्महत्या करने की घटनाएं होती हैं।
-मेरी मां से नहीं मिले अफसर
हेड कांस्टेबल ओमवीर ने कहा कि कुछ दिन पहले उनकी बुजुर्ग मां अपने पोते के साथ ट्रेन से लखनऊ गई थी, लेकिन वहां पर अफसरों ने उनसे मुलाकात नहीं की। इसके अलावा एक बार मेरठ में भी अफसर ने उनसे मुलाकात नहीं की और बाहर बैठाकर वापस भेज दिया गया, जबकि फरियादी से मिलने की सभी की जिम्मेदारी है। अन्य लोगों की सीधी मुलाकात भी कराई गई। उन्होंने कहा कि मेरी मां के साथ दो बार ऐसा हो चुका है, इससे महसूस होता है कि पुलिसकर्मियों के परिवारों का कोई सम्मान नहीं है। वीडियो के अंतिम में उन्होंने कहा कि फेसबुक पर वीडियो अपलोड करने पर उसे लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके बाद मानसिक स्थिति खराब होने का बयान भी जारी किया गया, जबकि उसकी मानसिक हालत ठीक है, लेकिन अब ऐसे हालात में परेशानी होने लगी है।
-मेरी तरह दूसरा कोई वीडियो डाले, उससे पहले समीक्षा करा लो...
हेड कांस्टेबल ने कहा कि मेरी मानसिक हालत ठीक नहीं होने के बयान से मेरी मां और परिचित भी परेशान हो गए, जिन्होंने फोन करके जानकारी भी की। परिवार के लोग भी काफी चिंतित हैं। बताया कि मेरी मां की दो बार हालत बिगड़ चुकी है। वीडियो अपलोड करने का उद्देश्य सिर्फ पुलिसकर्मियों की मौतों पर प्रकाश डालना है। उन्होंने कहा कि हर दूसरे दिन पुलिसकर्मी आत्महत्या कर रहे हैं, जो एक सामाजिक समस्या है। पुलिस वेलफेयर में आने वाली शिकायतों का संज्ञान लेकर बॉर्डर स्कीम हटाई जाए। मुझे लाइन हाजिर के बजाय समीक्षा करने के आदेश जारी किए जाते तो अच्छा होता। मेरी तरह दूसरा पुलिसकर्मी ऐसी वीडियो न डाले, उससे पहले समीक्षा कराकर समाधान करा लिया जाए।
वर्जन
पहले हेड कांस्टेबल की काउंसिलिंग भी कराई गई। अब दोबारा वीडियो जारी के मामले में सीओ को जांच सौंपी गई है, उनकी जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -सूरज कुमार राय, एसपी