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करोड़ों के बिजली बिल पर कुंडली मारकर बैठे सरकारी विभाग
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बड़ौत (बागपत)। सरकारी विभागों पर ऊर्जा निगम के तकरीबन 11 करोड़ रुपये पर बिजली बिल के रुप में बकाया हैं। निगम की ओर से लगातार इन विभागों को पत्र लिखा जा रहा है, लेकिन बिजली बिल चुकाने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। बकाएदारों की सूची में डेढ़ दर्जन सरकारी दफ्तर शामिल हैं। सबसे ज्यादा शिक्षा, पुलिस और चिकित्सा विभाग पर बकाया है। विभागीय अधिकारी इसे लेकर बजट का रोना रो रहे है।
किस पर कितना बकाया
शिक्षा विभाग 463.90
पुलिस विभाग 306.30
चिकित्सा विभाग 168.27
नगर विकास 66.96
स्थानीय निकाय 10.48
न्याय विभाग 2.38
पशु चिकित्सालय 1.97
ग्राम विकास 1.29
कारागार 26.71
वन विभाग 1.66
लोक निर्माण विभाग 1034
कुल 1060.26 लाख
किसानों व आम उपभोक्ताओं पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
भाकियू नेता व जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह का कहना है कि किसानों व आम उपभोक्ता पर थोड़ा भी बकाया होता है तो उनके कनेक्शन काट दिए जाते है। एफआईआर तक कराई जाती है। मगर, सरकारी विभागों पर निगम का करोड़ों रुपये बकाया है, लेकिन इसे लेकर कोई गंभीर नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आम उपभोक्ता व किसानों पर इस तरह का दवाब न बनाएं। क्योंकि पहले से ही किसान बकाया गन्ना भुगतान न होने से तंगी झेल रहा है जबकि आम उपभोक्ता की महंगाई ने कमर तोड़ दी है।
कई बार भेजे जा चुके है पत्र
सरकारी दफ्तरों के विभागाध्यक्षों को मुख्य सचिव के आदेश का हवाला देते हुए शीघ्र बकाया बिल जमा करने के लिए पत्र लिखा गया है। इसके बावजूद सरकारी विभागों के अफसर गंभीर नहीं है। - रणविजय सिंह, एसई।
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किस पर कितना बकाया
शिक्षा विभाग 463.90
पुलिस विभाग 306.30
चिकित्सा विभाग 168.27
नगर विकास 66.96
स्थानीय निकाय 10.48
न्याय विभाग 2.38
पशु चिकित्सालय 1.97
ग्राम विकास 1.29
कारागार 26.71
वन विभाग 1.66
लोक निर्माण विभाग 1034
कुल 1060.26 लाख
किसानों व आम उपभोक्ताओं पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
भाकियू नेता व जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह का कहना है कि किसानों व आम उपभोक्ता पर थोड़ा भी बकाया होता है तो उनके कनेक्शन काट दिए जाते है। एफआईआर तक कराई जाती है। मगर, सरकारी विभागों पर निगम का करोड़ों रुपये बकाया है, लेकिन इसे लेकर कोई गंभीर नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आम उपभोक्ता व किसानों पर इस तरह का दवाब न बनाएं। क्योंकि पहले से ही किसान बकाया गन्ना भुगतान न होने से तंगी झेल रहा है जबकि आम उपभोक्ता की महंगाई ने कमर तोड़ दी है।
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कई बार भेजे जा चुके है पत्र
सरकारी दफ्तरों के विभागाध्यक्षों को मुख्य सचिव के आदेश का हवाला देते हुए शीघ्र बकाया बिल जमा करने के लिए पत्र लिखा गया है। इसके बावजूद सरकारी विभागों के अफसर गंभीर नहीं है। - रणविजय सिंह, एसई।
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